
राजपूत सरदार श्यामसिंह 400 सालों पहले परिवार के साथ आए थे और बनाया था गढ़ तभी से कहलाया शामगढ़
मंदसौर.
क्षेत्र के श्रद्धालुओं का प्रमुख आस्था का केंद्र नगर में स्थित माता महिषासुर मर्दिनी का मंदिर है। ४०० साल से अधिक पुराना मंदिर का इतिहास है और इतने ही सालों से मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां मनोकामनाएं लेकर भक्त पहुंचते है। नवरात्रि के दौर में यहां अनेक धार्मिक आयोजन होंते है। नगर परिषद के वार्ड 1, 2, 3, 4 की प्रमुख कॉलोनियों के मध्य एक ऊंची लाल पहाड़ी पर घनी आबादी के बीच बसा है। अति प्राचीन मंदिर मां महिषासुर मर्दिनी देवी मंदिर को यहां से जुड़े भक्त माता के चमत्कार का सबसे बड़ा प्रमाण मानते है। दोनों नवरात्रि पर प्रतिमा को ध्यान से देखें तो मां सुबह, दोपहर एवं संध्या के समय अलग-अलग मुख मुद्रा में विद्यमान रहती है।
यह है मंदिर का इतिहास
400 से अधिक वर्ष पूर्व विक्रम संवत 1623 में रामपुरा से राजपूत सरदार श्यामसिंह अपने परिवार के साथ यहां बसे। उन्हीं ने स्थान पर गढ़ बनाकर अपने नाम के अनुसार इस स्थान का नाम श्यामगढ़ रखा। जो आज शामगढ़ के नाम से जाना जाता है। वर्ष 1946 के बाद वैद्य बालाराम चौहान ने मंदिर का समुचित विकास उस समय समिति का गठन करवा कर पूरे मंदिर में कांच जड़वाए। यह कांच के मंदिर के नाम से पूरे जिले में प्रसिद्व है।
नगर परिषद प्रतिवर्ष अक्षय तृतीया से मां के नाम से पशु मेला आयोजित करती है। वर्तमान में प्रशासन के हाथों में इसकी देख रेख है। मंदिर की प्रसिद्धि के चलते यहां विकास की बहुत संभावनाएं हैं। मंदिर नव निर्माण को लेकर प्रशासन एवं जन सहयोग से करोड़ों रुपए की लागत से बनाया जाएगा। मंदिर निर्माण समिति के सदस्यों द्वारा लगातार समर्पण राशि एकत्रित की जा रही है नगर में से वही भव्य मंदिर निर्माण की परिकल्पना तैयार की जा रही है। लगातार 2 सालों से कोरोना संक्रमण के चलते प्रशासन द्वारा दोनों नवरात्रि में निकलने वाली चुनरी यात्रा भी कैंसिल की गई वही मंदिर के में समीप लगने वाला भंडारा भी कैंसिल किया गया सिर्फ 11 कन्याओं को भोजन प्रसादी ग्रहण करवा कर पूजा अर्चना की गई थी, लेकिन इस बार चैत्री नवरात्रि पर चुनरी यात्रा भी निकली और नगर एवं आसपास क्षेत्र के मां के भक्तों ने बढ़ चढक़र हिस्सा लिया। प्रतिदिन मां के दरबार में गरबे का आयोजन भी किया जा रहा है। रात्रि को वहीं दुर्गा नवमी पर मां के मंदिर के समीप चुल का आयोजन होगा। दहकते हुए अंगारों पर पहले पूजारी बगदीराम योगी निकलेंगे और बाद में बड़ी संख्या में श्रद्धालु निकलेंगे हवन एवं पूर्णाहुति होगी। इसके बाद महाभंडारे का आयोजन भी होगा। जन सहयोग से पंडित बगदीराम योगी ने बताया कि मां महिषासुर मर्दिनी देवी माता मंदिर में दोनों नवरात्रि पर विशेष श्रृंगार प्रत्येक दिन एवं मंदिर को रंग बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है। वही इस बार नवरात्रि पर पूरे मंदिर को 5 क्विंटल अलग-अलग प्रकार के रंग-बिरंगे फूलों से मां के दरबार को सजाया गया है। संध्या आरती सुबह 6.15 पर और शाम की आरती 6.45 पर की जा रही है। मंदिर में बड़ी संख्या में भक्तजन आरती में सम्मिलित होने पहुंच रहे हैं।
अष्टमी को उमड़ी भीड़, आज नवमी पर होंगे कार्यक्रम
महिषाुसर माता मंदिर पर शनिवार को अष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ी। शाम के समय मंदिर पर भक्तों का तांता लगा रहा तो माता की एक झलक पाने को भक्त आतुर दिखें। वहीं रामनवमी पर रविवार को कई आयोजन होंगे। नवरात्र के इस दौर में माता का यह मंदिर आकर्षक रोशनी से झिलमिला रहा है।
Published on:
10 Apr 2022 10:09 am

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