मंदसौर.
मां शिवना के जल को निर्मल करने और नदी को स्वच्छ करने के लिए प्रयास और दावों का दौर पिछले दो दशक से चल रहा है। लेकिन इच्छाशक्ति के अभाव में अब तक यह हो नहीं पाया है। नतीजतम शिवना के आंचल को शहर से निकलने वाला सीवरेज का गंदा पानी प्रदूषण का दाग लगा रहा है। प्रदूषण विभाग ने भी पानी की जांच की तो पानी में प्रदूषण का स्तर लगातार बढऩा बताया। पानी से उठती दुर्गंध प्रदूषण का स्तर खुद बता रही है लेकिन यह दुर्गंध उन जवाबदारों तक नहीं पहुंच रही है जिन्हें सीवरेज को नदी में मिलने से रोकने के लिए नालों का डायवर्ड करने का काम करना है। सालों से प्रयोगशाला बना रखी शिवना पर हर साल श्रमदान भी होता है तो कई संस्थाएं इस पर काम भी कर रही है लेकिन तमाम संसाधन के बाद भी नालों के पानी से नदी में बढ़ रही गंदगी को रोका नहीं जा सकता है।
शुद्धिकरण में सबसे बड़ी अड़चन सीवरेज
शिवना शुद्धिकरण में सबसे बड़ी अड़चन इसमें मिल रहे सीवरेज को रोकना है। ५४ किमी की शिवना नदी में शहरीय क्षेत्र का ८ किमी के क्षेत्र अत्यधिक प्रदूषित है। इस क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक जगहों पर बड़े नालों से हर दिन बड़ी मात्रा में गंदा पानी नदी में मिल रहा है जो नदी में प्रदूषण का स्तर बड़ा रहा है। प्रदूषित हो रही नदी में ऑक्सीजन कम होने से मछलियों से लेकर जलीय जंतुओं की मौत हर साल होती है। स्वच्छ शिवना के सपने को साकार करने के लिए गंदे पानी को मिलने से रोकना और उतना ही जरुरी है अलावदाखेड़ी में शिवना पर बने स्टॉपडेम का हल खोजना। जिनके कारण नदी वर्षभर दूषित रहती है।
जनआस्था का केंद्र उसे ही बना दिया गंदा नाला
विश्व प्रसिद्ध अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ के चरण पखारने वाली शिवना जनआस्था का केंद्र है। लेकिन वर्तमान में नालों के पानी और मिल रहे सीवरेज का कारण यह गंदा नाला बन गई है। जो आस्था का केंद्र है उसे ही नाला बना दिया फिर भी इस पर कोई गंभीर नहीं है। बड़ी विड़बना तो यह है कि शिवना शुद्धिकरण के लिए अब तक हुए प्रयासों और सर्वे के बीच बैठकों में हर एक पहलू पर मंथन हुआ लेकिन नालों से जो दूषित पानी हर दिन मिल रहा है उसे रोकने के लिए गंभीर कोई नहीं है।
८ किमी क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक नालें
शहरीय क्षेत्र में ८ किमी क्षेत्र में शिवना नदी में प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक है। इसमें रेलवे ब्रिज से लेकर मुक्तिधाम और यहां पुलिया वाला क्षेत्र तो भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में छोटी व बड़ी पुलिया के यहां मिल रहे नालों के साथ प्रतापगढ़ रोड पर बुगलिया नाला भी इसमें मिल रहा है। ऐसे कई जगहों पर नालों का पानी नदी में मिल रहा है। वहीं कचरा और अपशिष्ट भी हर दिन इसें बहाया जा रहा है। पशुपतिनाथ मंदिर क्षेत्र में बड़ी पुलिया से लेकर छोटी पुलिया और कोर्ट के निचले क्षेत्र तक मिल रहे नालें भी इसकी बड़ी वजह है। इतना ही नहीं कई पांईट ऐसे है कि पाईप डालकर नदी के बीच में गंदे पानी को छोड़ा जा रहा है। वहीं खानपुरा में तीन छत्री बालाजी के समीप बड़ा नाला इसमें मिल रहा है। इस तरह शहरीय क्षेत्र में कई जगहों पर शहर के गंदे पानी के नालों से नदी में सीवरेज मिल रहा है।
मंदिर क्षेत्र में सबसे अधिक प्रदूषण, दुर्गंध से भक्त होते है परेशान
भगवान पशुपतिनाथ मंदिर पर दूर-दरार्ज से भक्त दर्शन करने पहुंचते है। शिव के आंगन में बह रही शिवना की दूर्दशा के साथ बढ़ते प्रदूषण के कारण फैल रही दुर्गंध इन भक्तों को परेशान करती है। मंदिर क्षेत्र में सीवरेज के कारण बढ़ रहा प्रदूषण देशभर से आने वाले भक्तों की नजर में शिवना की दुर्दशा को बया करती है। इतना ही नहीं मुक्तिधाम क्षेत्र में बड़ी पुलिया व रेल ओवरब्रिज से शहर में प्रवेश करने वाले यात्रियों के लिए यहां से उठती दुर्गंध ही पहचान बन गई है।