सुहाग की लंबी उम्र के लिए कल महिलाएं रखेगी करवा चौथ का व्रत
मंदसौर.
करवा चौथ का पर्व कल शहर सहित जिले में परंपरागत ढंग से मनाएगी। बाजार में इसे लेकर दुकानें सज चुकी है तो फूटपाथ पर भी पर्व को लेकर करवों से लेकर छलनी को सजाकर बेचा जा रहा है। करवों की खरीदी के लिए महिलाएं बाजार में पहुंच रही है। महिलाओं के लिए इस पर्व का विशेष महत्व होता है। प्राचीन मान्यताओं के चलते करवा चौथ का यह पर्व महिलाओं के लिए अहम है। बाजार में करवों से लेकर छलनी की खूब बिक्री हुई हो रही है। महिलाएं इस दिन दिनभर निर्जल रहकर अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर व्रज रखेगी और रात को चांद की पूजा कर सुहाग की लंबी उम्र की कामना करेगी। करवा चौथ का व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मूल रूप से भगवान गणेश, मां गौरी और चंद्रमा की उपासना होती है। चंद्रमा को मन, आयु, सुख और शांति का कारक माना जाता है इसलिए चंद्रमा की पूजा महिलाएं सुख, शांति और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।
करवा चौथ का इन पौराणिक कथाओं के कारण है महत्व
पुराणों के अनुसार चंद्रमा नक्षत्रों में रोहिणी नक्षत्र को अत्यधिक प्रेम करता है। उसकी स्थिति इसी नक्षत्र पर होने से वह प्रेम प्रवर्धन की समृद्धि करने वाला योग निर्मित कर रहा है। यह व्रत सुहागिनें अपने पति के मंगल और समृद्धि के लिए करती हैं। कहा जाता है कि पांडवों पर घोर विपत्ति का समय आया। तब द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण का आह्वान किया। श्रीकृष्ण ने कहा था कि यदि तुम भगवान शिव के बताए हुए व्रत करवाचौथ को आस्था और विश्वास के साथ संपन्न करोगी तो समस्त कष्टों से मुक्त हो जाओगी। समृद्धि स्वयं ही प्राप्त हो जाएगी। मगर ध्यान रखना व्रत के दौरान भोजन, पानी वर्जित है।
करवा चौथ की शुरुआत देवताओ पत्नियों ने की
वहीं अन्य पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवताओं की पत्नियों ने उनकी मंगलकामना और असुरों पर जीत पाने के लिए करवा चौथ जैसा व्रत रखा था। वहीं एक बार असुरों और देवों में युद्ध छिड़ गया। ऐसे में सारे देवता ब्रह्मा के पास असुरों को हराने का उपाय जानने गए। ब्रह्मा ने देवताओं की समस्या को पहले से जानते थे। उन्होंने देवताओं से कहा कि वो अपनी-अपनी पत्नियों से कहें कि वो अपने पति की मंगलकामना और असुरों पर विजय के लिए व्रत रखें। वहीं राजा सत्यवान और उसकी पत्नी थी। सावित्री की कथा का भी इस पर्व पर विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि सावित्री ने पति को पुर्नजीवित कर दिया था। इसका धार्मिक के साथ वैज्ञानिक महत्व भी है।
..........................