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शेयर बाजार में यह गिरावट क्या है खरीदारी का मौका? एक्सपर्ट से समझिए

पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है जिसके बाद निवेशक घबराए हुए है।
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भारत

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Gajanand Prajapat

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Updated: 9 Mar 2026, 5:08 PM IST

Stock Market Crash

शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज हुई है। (PC: AI)

पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय शेयर बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स में 6.31 प्रतिशत यानी 5,100 से अधिक अंकों की गिरावट आ चुकी है, जिससे निवेशकों की संपत्ति बड़े पैमाने पर स्वाहा हो गई है। घबराए हुए निवेशक नुकसान से बचने के लिए अपने शेयर बेच रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह समय घबराने का नहीं, बल्कि सोच-समझकर कदम उठाने का है।

बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल है। ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इजरायल के ईरानी तेल रिफाइनरियों पर हमले और ईरान की जवाबी कार्रवाई से खाड़ी देशों की रिफाइनरियों को नुकसान हुआ है। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद होने की कगार पर है, जिससे UAE और कुवैत ने तेल उत्पादन में कटौती कर दी है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए इसका असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ रहा है।

तेल बाजार का सबसे ज्यादा असर भारत पर

भारत के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें दोहरी मार हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है, चालू खाता घाटा बढ़ता है, महंगाई बढ़ती है और बाजार में नकारात्मक भावना फैलती है। सैमको सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड अपूर्व शेठ के अनुसार, क्रूड ऑयल और निफ्टी फिफ्टी के बीच उलटा संबंध है और यदि कच्चा तेल 113-115 डॉलर के स्तर पर बना रहा, तो इक्विटी बाजारों पर दबाव जारी रह सकता है।

खरीदारी का मौका

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि बाजार में गिरावट बॉटम फिशिंग यानी गिरे हुए शेयर सस्ते में खरीदने का शानदार मौका भी है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्राइम रिसर्च हेड देवर्ष वकील का कहना है कि तेज गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छे शेयर जमा करने का अवसर देती है। इतिहास यह भी बताता है कि भू-राजनीतिक संकटों का बाजार पर असर ज्यादा लंबे समय तक नहीं रहता और बाजार हमेशा ठीक होकर नई ऊंचाइयों पर पहुंचा है।

लंबे समय तक नहीं रहेगी समस्या

अलग-अलग सेक्टर की बात करें तो बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, सीमेंट, रक्षा और फार्मास्युटिकल जैसे घरेलू खपत से जुड़े सेक्टर इस संकट में अपेक्षाकृत मजबूत बने रह सकते हैं। इनक्रेड रिसर्च सर्विसेज के प्रबंध निदेशक सतीश कुमार ने कहा कि 115 डॉलर प्रति बैरल का तेल भाव लंबे समय तक टिकना मुश्किल है और जैसे ही स्थिति सामान्य होगी, बाजार अपने बुनियादी आधार पर वापस लौट आएगा।

म्युचुअल फंड एसआईपी में करें निवेश

म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि SIP बंद करने की गलती न करें। बाजार में गिरावट के दौरान SIP की एक निश्चित रकम से ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, जो लंबे समय में पोर्टफोलियो को मजबूत बनाती हैं। गिरावट के बावजूद देश में, म्यूचुअल फंड निवेशकों ने पिछले कई महीनों में भारी निवेश किया है, SIP निवेश हर महीने 20,000 करोड़ रुपए से ऊपर बना हुआ है, जो दर्शाता है कि अनुभवी निवेशक बाजार पर भरोसा बनाए हुए हैं। कुल मिलाकर, रणनीति यह होनी चाहिए कि SIP जारी रखें।