
भारत के पांच बड़े शेयर बाजार संकट। PC: (AI)
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव तो हमेशा ही देखने को मिलते है। लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी होती है, जो अपना ऐसा असर छोड़ कर जाती है जो कई सालों तक याद रहती है। भारतीय शेयर बाजार में पिछले दस सालों में ऐसी ही कई बड़ी घटनाएं देखने को मिली है। इस तरह की घटनाओं ने निवेशकों को चौंका दिया है। लेकिन इन बड़ी गिरावटों के बावजूद शेयर बाजार ने निवेशकों को भारी रिटर्न दिया है। निफ्टी फिफ्टी ने पिछले दस सालों में लगभग 68 फीसदी का रिटर्न और सेंसेक्स ने 195 फीसदी का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है।
8 नवंबर, 2016 की रात नोटबंदी की घोषणा के बाद, 9 नवंबर को बाजार की शुरुआत ही दहशत के साथ हुई। इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप की जीत के शुरुआती रुझानों ने भी वैश्विक अस्थिरता को बढ़ाते हुए बाजार को प्रभावित किया। लगातार बड़ी बिकवाली के कारण बाजार धाराशायी हो गया।
इस मार्केट क्रेश में सेंसेक्स 1,689 अंक यानि 6.12 फीसदी गिरकर 26,902 पर और निफ्टी फिफ्टी 6.33 फीसदी यानि 541 अंक गिरकर 8,002 पर आ गई। रियल एस्टेट और आवास वित्त कंपनियों में भारी मंदी देखी गई, जबकि सोने की कीमतों में उछाल आया। यह गिरावट शेयर बाजार के इतिहास में प्रमुख घबराहट भरी बिकवाली के रूप में जानी जाती है।
देशव्यापी लॉकडाउन और कोविड-19 महामारी की घबराहट के बाद बाजार में भारी गिरावट आई। 23 मार्च, 2020 को भारतीय शेयर बाजार में ऐतिहासिक गिरावट देखी गई, जिसमें सेंसेक्स एक ही सत्र में 3,935 अंक या 13.15 फीसदी गिर गया, जबकि निफ्टी फिफ्टी 1,135 अंक या 12.98 फीसदी गिर गई।
इससे पहले जनवरी 2020 में मार्केट अपने चरम पर था। लेकिन मार्च में अपने निचले स्तर यानि की अपने मूल्य का लगभग 38 फीसदी खो दिया। महामारी के वैश्विक प्रभाव के कारण हाल के इतिहास में यह घटना सबसे गंभीर बाजार संकटों में से एक बनी हुई है।
जनवरी 2023 में अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च की एक रिपोर्ट ने अदाणी समूह पर स्टॉक हेरफेर और अकाउंटिंग धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए। रिपोर्ट में अदानी समूह को निशाना बनाए जाने के बाद, समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर ने कुछ ही हफ्तों में 100 अरब डॉलर से अधिक का बाजार मूल्य खो दिया। हालांकि इस मार्केट क्रेश ने कोविड-19 के समान व्यापक बाजार संकट को जन्म नहीं दिया।
4 जून 2024 को लोकसभा चुनाव परिणामों के दौरान भारतीय शेयर बाजार में ऐतिहासिक गिरावट देखी गई। शुरुआती रुझानों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत न मिलने के संकेत से सेंसेक्स 3,700 से अधिक अंक गिरकर 72,079 पर और निफ्टी 900 से अधिक अंक गिरकर 21,884 पर बंद हुआ, जो पिछले चार वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट थी। एक दिन पहले मजबूत एग्जिट पोल की आशा के चलते रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बावजूद, बाजार में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई।
शेयर बाजार में देखी गई बड़ी उथल-पुथल अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण हुई, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया। आज भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स लगभग 2,500 अंक से अधिक गिरकर 76,424 के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी फिफ्टी 750 अंक अधिक गिरकर 23,697 पर आ गई। बाजार में यह गिरावट कच्चे तेल की कीमतों में 115 डॉलर प्रति बैरल की कीमत के बाद देखी गई। इसका प्रभाव मुख्य रूप से विमानन कंपनियों और पेंट कंपनियों के शेयरों में गिरावट से दिखा।
Updated on:
9 Mar 2026, 4:26 PM IST
Published on:
9 Mar 2026, 4:25 PM IST
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