
भारत आस्था, परंपरा और मान्यताओं का देश है। देशभर में कई ऐसे मंदिर और कुंड हैं इतिहास और रहस्य लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करता है। ऐसे ही उत्तर प्रदेश के मथुरा में एक कुंड मौजूद है जहां रात के 12 बजे स्नान करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इस जगह दो कुंड हैं एक कृष्ण कुंड और दूसरा राधा कुंड।
मीडिया रिपोर्ट्स के दावों के अनुसार अहोई अष्टमी के दिन जो भी दंपति राधा कुंड में साथ में स्नान करते हैं, उनको संतान की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि राधा रानी स्वयं दंपति को जल रूप में संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देती हैं। इसलिए इस दिन लाखों की संख्या में लोग इस कुंड में स्नान करने आते हैं।
अहोई अष्टमी माओं द्वारा संतान की लम्बी आयु, सुरक्षा और उनके सुखी जीवन के लिए किया जाता है। इस दिन माताएं निर्जला व्रत करती हैं और अहोई अष्टमी पर स्याही माता और अहोई माता की पूजा का विधान हैं। अगर किसी महिला के बच्चे नहीं हो रहे तो ऐसे में वह भी ये व्रत करती हैं। पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद रात को तारे देखकर ये व्रत तोड़ते हैं।
अहोई अष्टमी पर कांसे के लोटे का उपयोग अर्घ्य बिल्कुल नहीं देना चाहिए। इस व्रत की पूजा में पहले इस्तेमाल हुई पूजा सामग्री का प्रयोग दोबारा नहीं करना चाहिए। इस दिन प्याज और लहसुन भी खाने पर मनाही है। अहोई अष्टमी व्रत के दौरान महिलाओं को दिन में सोना नहीं चाहिए और बुजुर्गों का अनादर करने से बचना चाहिए।
अहोई अष्टमी के दिन घर में तुलसी का पौधा जरूर लगाना चाहिए। रोज विधि-विधान से पूजन करने पर संतान का जीवन खुशहाल रहता है। इसके अलावा अहोई अष्टमी के दिन आप जो भी भोजन बनाएं उसमें से एक हिस्सा गाय के लिए निकाल दें। बाद में भोजन गाय के बछड़े को खिला दें।
नोट: यह खबर धार्मिक मान्यताओं और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर बनाई गई है। पत्रिका उत्तर प्रदेश इस खबर में किए गए दावों की पुष्टि नहीं करता है।
Updated on:
24 Oct 2024 05:14 pm
Published on:
24 Oct 2024 04:05 pm

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