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Deaf and mute children with sant Premanand Maharaj Vrindavan Mathura मथुरा के वृंदावन में मुख बधिर बच्चों ने प्रेमानंद महाराज के सामने भक्ति नृत्य प्रस्तुत किया। जिसे देखकर प्रेमानंद महाराज मंत्र-मुग्ध हो गए। इस मौके पर मुख बधिर बच्चों को लेकर पहुंची दिव्यांग डेवलपमेंट सोसाइटी की अध्यक्ष मनप्रीत कौर ने प्रेमानंद महाराज को मुख बधिर बच्चों के विषय में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह बच्चे बोल और सुन नहीं सकते हैं। लेकिन इन्होंने आपसे मिलने के लिए कड़ी मेहनत की है। वे 2 मिनट की एक प्रस्तुति देना चाहती हैं। जिसे संत प्रेमानंद महाराज ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। फिर क्या था, संत प्रेमानंद महाराज हाथ जोड़कर एकटक बच्चियों को देखते रहे। इस मौके पर संत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि बच्चों को उन्हीं की भाषा में राधा नाम स्कमरण करने के लिए प्रेरित किया जाए।
उत्तर प्रदेश के कानपुर की दिव्यांग डेवलपमेंट सोसाइटी की अध्यक्ष मनप्रीत कौर के लिए भी खास दिन था। जब मूक-बधिर बच्चों को लेकर संत प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए पहुँची। मनप्रीत कौर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हैं। उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से कहा कि यह बच्चे सुन या बोल नहीं सकते हैं; इन्हें पागल और चालक कहा जाता है।
मनप्रीत कौर ने बच्चों की कला प्रस्तुति के विषय में बताते हुए कहा कि ये बच्चे सुन नहीं सकते हैं इसलिए हाथ के इशारे से खुशी प्रकट कर रहे हैं। इस मौके पर "अरे मान ले चल वृंदावन" गीत मुख बधिर बच्चियों ने अपनी प्रस्तुति दी। संत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि बच्चों ने बहुत सुंदर प्रस्तुति दी है। इस मौके पर मनप्रीत कौर ने संत प्रेमानंद महाराज से पूछा कि इन बच्चों को अध्यात्म से कैसे जोड़ा जाए। इसका मार्गदर्शन करें।
इस पर संत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि किसी तरह आपके निर्देशन में किसी प्रकार नाम स्मरण करने लगे तो बात बन जाए। राधा राधा के नाम जाप करने से इनका हृदय निर्मल हो जाएगा। निष्पाप होने लगेगा, इनका मंगल होगा। इस मौके पर उन्होंने रामायण की चौपाई सुनाई: "भायं कुभायं अनख आलसहूं। नाम जपत मंगल दिसि दसहूं" यह बच्चे नाम जाप करने लगे। इस प्रकार की इन्हें प्रेरणा दीजिए।
Published on:
02 Feb 2026 02:39 pm

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