अलग ही रहा शुक्रवार का दिन
गोकुलवासियों के लिए शुक्रवार की सुबह कुछ अलग रहीं। यहां नंदभवन पर तड़के ही नक्कारे की धुन पर शहनाई गूंज उठी। भक्तों का रेला को अंधेरा छंटने से पहले ही यहां पहुंच गया था। उधर, मुरलीधर घाट से लाला का डोला निकाला गया। डोले में बधाईयों पर झूमते भक्तों के समूह बेसुध नजर आ रहे थे। यह डोला नंदचौक पहुंचा तो उल्लास भी चरमता को छूचा नजर आया। पालने में विराजे नंदलाल की एक झलक पाने को भक्त समूह बेताब था। जमीन पर पांव रखने की जगह नहीं तो भक्त घरों की छतों और पेड़ों पर चढ़ गए। श्रीकृष्ण व बलराम के स्वरूपों के यहां पहुंचते ही नंद के आनंद भयौ, जय कन्हैया लाल की, हाथी दीनै-घोड़ा दीनै और दीनी पालकी, गोकुल में मच गयौ हल्ला, जायौ यशोदा ने लल्ला आदि के जयघोषों से सम्पूर्ण गोकुल की गलियां गुंजायमान हो गईर्। ठाकुर जी को माखन-मिश्री, लड्डू, जलेबी, पेड़ा, दही, मेवा आदि का भोग अर्पित किया गया। स्वरूपों के साथ चल रही खुदा बक्श शहनाई पार्टी द्वारा प्रस्तुत कान मैं तेरे कछु कह गई होगी, भयौ नंद-यशोदा के लल्ला बधाई बाज रही आदि भजनों पर ग्वाल-बाल नाचते गाते चल रहे थे।

लुटाए गए अपार उपहारगोकुल के नंद चौक पर उपहार लूटने की श्रद्धालुओं में होड़ मची रही। हर कोई बस प्रसाद रूपी किसी भी एक वस्तु का पाने के लिए लालयित दिखा। सेवायतों व दिल्ली, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सुल्तानपुर, मेरठ, बम्बई, राजस्थान आदि से आए मठाधीशों ने भक्तों को उपहार लुटाए व बधाई दी। हर कोई साड़ी, मेवा, मखाने, रूपए, फल, मिठाई, बिस्कुट-नमकीन, आभूषण, कंठी आदि को लूटने के लिए खींचतान करता दिखा।

लाला की छीछी से सराबोर हुए भक्तगोकुल। नंदोत्सव में कान्हा के ग्वाल-बालों का जोश भी सिर चढ़कर बोल रहा था। अधिकांश युवा हाथ में हांडी लिए हुए थे, जिसमें लाला की छीछी (हल्दी व दही का मिश्रण) भरी हुई थी। दधिकांधा के दौरान वे भक्तों पर इस प्रसाद रूपी छीछी की वर्षा कर रहे थे। भक्त भी इस प्रसाद को पाने के लिए उत्सुक दिखे।

कृष्ण जन्मस्थान व द्वारिकाधीश उमड़ा रेलामथुरा। भारत विख्यात द्वारिकाधीश और श्रीकृष्ण जन्मस्थान का नंदोत्सव भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र बना रहा। द्वारिकाधीश में कई घंटे तक भक्तों के टोल बधाईयों पर थिरकते रहे। महिला-पुरुष भक्तों के बीच तो गायन की प्रतियोगिता सी होती नजर आई। मंदिर परिसर में खिलौने, माखन-मिश्री, मेवा व फलों की अटूट वर्षा हुई। उधर, श्रीकृष्ण जन्मस्थान का भागवत भवन भी नंदोत्सव की धूम में डूबा नजर आया। बीती रात जहां यहां जन्माभिषेक की झलक पाने को भक्तों का सैलाब आतुर था, वहीं शुक्रवार को नंदोत्सव का दिन उनके लिए सब कुछ अपने लाला पर लुटा देने वाला रहा। यहां भक्तों को उपहारों की अटूट वर्षा की गई। इन उपहारों को लूटने का भक्तों में ऐसा उत्साह दिखा, जैसे उनको अमृत मिल गया हो।
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