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जलती होलिका में कुदा पंडा, 20 फीट ऊंची लपटों से दौड़कर निकला बाहर

होलिका दहन पर मथुरा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एख पंडा जलती आगों के बीच कुद गए।

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मथुरा

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Anuj Singh

Mar 03, 2026

20 फीट ऊंची जलती होली में कूदा पंडा

20 फीट ऊंची जलती होली में कूदा पंडा

Holi 2026 Mathura News: ब्रज क्षेत्र में होली का उत्सव 45 दिनों तक चलता है। लेकिन मथुरा जिले के फालैन गांव में एक बहुत ही हैरान करने वाला और आस्था से भरा नजारा देखने को मिला। यहां होलिका दहन के दौरान जलती हुई होली की आग के बीच से एक पंडा दौड़कर निकल गया। आग 20 फीट लंबी और 30 फीट चौड़ी थी, लेकिन पंडा को जरा भी नहीं जला। हजारों लोग यह देखकर दंग रह गए और जोर-जोर से 'श्रीकृष्णा… श्रीकृष्णा' के नारे लगाने लगे।

यह परंपरा बहुत पुरानी बताई जाती है। गांव वाले कहते हैं कि यह सतयुग से चली आ रही है। इस बार संजू पंडा ने यह कारनामा किया। वे दूसरी बार जलती होली से निकले। इससे पहले उनके भाई मोनू पंडा 4 बार और पिता सुशील पंडा 8 बार ऐसा कर चुके हैं।

फालैन गांव कहां है और क्यों प्रसिद्ध?

फालैन गांव मथुरा जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर छाता तहसील में बसा है। यहां भक्त प्रह्लाद का मंदिर है। मान्यता है कि इसी जगह पर राजा हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठने को कहा था। लेकिन भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद की रक्षा हुई, उनका बाल भी बांका नहीं हुआ और होलिका जलकर राख हो गई। इसी घटना को याद करने के लिए पंडा परिवार की यह परंपरा चल रही है।

45 दिनों का कठोर व्रत और नियम

संजू पंडा ने बताया कि इस परंपरा की तैयारी बसंत पंचमी से शुरू होती है। वे 45 दिन (सवा महीना) का सख्त व्रत रखते हैं। इस दौरान वे मंदिर में ही रहते हैं, घर से अलग। दिन में सिर्फ एक बार फलाहार करते हैं। पानी भी बहुत कम पीते हैं। सिर्फ हथेली में जितना आता है, उतना ही। गांव से बाहर नहीं जाते। जमीन पर बिस्तर लगाकर सोते हैं। सबसे महत्वपूर्ण, पूरी तरह ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। जप, पूजा और अनुष्ठान करते रहते हैं।

होलिका दहन का अद्भुत नजारा

होलिका दहन की रात देर से होली जलाई गई। जब आग पूरी तरह धधक रही थी और लपटें ऊंची उठ रही थीं, तब संजू पंडा नंगे पैर दौड़कर आग के बीच से निकले। लोग हैरान थे कि उनका शरीर बिल्कुल सुरक्षित रहा। इस अनोखे नजारे को देखने के लिए भारत के साथ विदेशों से भी लोग आए। करीब 50 हजार से ज्यादा पर्यटक और श्रद्धालु गांव में पहुंचे थे।