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सखियों के लट्ठ और हुरियारों की ढाल के बीच शुरू हुई लट्ठमार होली; 2000 किलो ठंडाई से हुआ भव्य स्वागत

Famous Lathmar Holi Festival: मथुरा के बरसाना में विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली की धूम मच गई है। सखियों ने हुरियारों पर लट्ठ बरसाए, 2000 किलो ठंडाई से स्वागत हुआ और लाखों श्रद्धालुओं ने इस अनोखी परंपरा का आनंद लिया।

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मथुरा

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Himesh Rana

Feb 25, 2026

Famous Lathmar Holi Festival: बरसाना की विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली बुधवार को पूरे विधि-विधान और उत्साह के साथ शुरू हुई। सुबह से ही बरसाना की गलियां रंग और उमंग से सराबोर नजर आईं। हर तरफ गुलाल उड़ता दिखाई दिया और श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की धुन पर नाचते और होली गीत गाते नजर आए।

परंपरा के अनुसार, बरसाना की सखियों ने नंदगांव से आए हुरियारों पर लट्ठ बरसाए, जबकि हुरियारे ढाल लेकर खुद का बचाव करते रहे। इस दौरान सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी भी इस परंपरा के रंग में रंगे नजर आए और माहौल पूरी तरह भक्तिमय और उत्सवी बना रहा।

हुरियारों के स्वागत में तैयार हुई 2000 किलो ठंडाई

नंदगांव से आने वाले हुरियारों के स्वागत के लिए पीली पोखर पर करीब 2000 किलो ठंडाई तैयार की गई। यहां हुरियारों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। प्रशासन के अनुसार, इस अद्भुत होली को देखने के लिए देश-विदेश से करीब 20 लाख श्रद्धालु और पर्यटक बरसाना पहुंचे हैं। विदेशी पर्यटक भी इस अनोखी परंपरा को देखकर उत्साहित नजर आए और उन्होंने इस पल को अपने कैमरे में कैद किया। पूरे आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित रखने के लिए 4500 से अधिक पुलिसकर्मी, PAC और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को तैनात किया गया है।

लाडली जी मंदिर में लड्डूमार होली के बाद लट्ठमार परंपरा

लट्ठमार होली से एक दिन पहले राधारानी मंदिर में लड्डूमार होली खेली गई थी। मंदिर परिसर में महंतों ने छत से श्रद्धालुओं पर लड्डू बरसाकर होली की शुरुआत की थी। इसके बाद समाज गायन हुआ और पारंपरिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। लट्ठमार होली उसी परंपरा का अगला और सबसे खास हिस्सा है, जिसका इंतजार श्रद्धालु पूरे साल करते हैं।

श्रीकृष्ण और राधारानी की प्रेम परंपरा से जुड़ी है लट्ठमार होली

पौराणिक मान्यता के अनुसार, श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ नंदगांव से बरसाना आते थे और यहां राधा रानी और उनकी सखियां उनका स्वागत हंसी-मजाक में लट्ठ से करती थीं। तभी से यह परंपरा लट्ठमार होली के रूप में मनाई जा रही है। आज भी उसी परंपरा को निभाते हुए हुरियारे बरसाना आते हैं और गलियों में होली खेलते हैं। यह अनोखा आयोजन भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपरा का अद्भुत उदाहरण है।

पूरे विश्व में प्रसिद्ध है लट्ठमार होली

बरसाना की लट्ठमार होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इस होली को देखने के लिए देश-विदेश से हर साल लाखों पर्यटक पहुंचते है। रंग, गुलाल, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक गीतों से इस होली का आगाज होता है। बरसाना की गलियों में होने वाला यह आयोजन आस्था, प्रेम और परंपरा का ऐसा अद्भुत संगम है, जिसे देखने के बाद विदेशी पर्यटक भी भारतीय संस्कृति के रंग में रंग जाते हैं।