
भूखे बच्चे को बेबस मां ने दूध की बोतल से पिलाया पानी, महिला ने सुनाई आपबीती
निर्मल राजपूत
एक्सक्लूसिव
मथुरा. पैदल चलकर कुछ देर आराम करने को गोद में बच्चा लिए एक मां थोड़ी देर छांव में बैठी कि नींद से जागा मासूम मारे भूख के रोने लगा। मासूम के करुण क्रंदन से मां का कलेजा फटा जा रहा था और अपने लाड़ले को भूख से बिलखता हुआ मां से भी नहीं देखा गया, अगले ही पल मां ने दूध की बोतल में पानी भरकर मासूम के मुंह में लगा दी। ममता की गोद में वह मासूम भी पानी को दूध मानकर पी गया और थोड़ी देर के लिए चुप भी हो गया लेकिन उसकी मां की आंखे नम हो गई।
दरअसल कोरोना के कारण देश में हुए लॉकडाउन के बाद महानगरों से प्रवासी मजदूरों के वापस अपने गांव अपने घर लौटने का सिलसिला जारी है। कुछ खुशकिस्मत है जो बसों और ट्रेनों से वापस लौट गए लेकिन अभी भी प्रवासी मजदूरों की एक बड़ी आबादी पैसे के अभाव में पैदल ही अपनी मंजिल तक की दूरी तय कर रही है। शनिवार को मथुरा में ऐसे ही कुछ प्रवासी मजदूर मसानी लिंक रोड स्थित ड्यूक पैलेस के सामने छांव में आराम करने बैठे। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।
इसी दौरान एक विचलित करने वाला दृश्य देखने को मिला। एक महिला जिसकी गोद में बच्चा था नींद से जागने के बाद रोने लगा। बच्चे के रोने पर उसकी मां कुछ परेशान दिखाई दी लेकिन अगले ही पल उसने बच्चे की दूध की बोतल में अपनी पानी की बोतल से पानी भरा और बच्चे के मुंह से लगा दिया और भूख से बिलखता बच्चा भी चुपचाप उसे पीने लगा। जब इस महिला से बात की गई तो उसने अपना नाम सावित्री बताया। महिला ने बताया कि वो अपने पति व अन्य लोगों से साथ नांगलोई ( दिल्ली) से वापस अपने घर बांदा जाने के लिए पैदल ही निकले हैं।
बच्चे के भूख से रोने पर महिला ने बताया कि पास में ना पैसे हैं और ना बच्चों को पिलाने के लिए दूध। खुद के लिए भी खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। बोझल आवाज में महिला ने कहा कि क्या करें मजबूरी है दूध नहीं है तो पानी ही पिला रहे हैं। उनके साथ और भी लोग थे जो सभी पैदल ही अपने अपने घर जाने को निकले थे। इनमें से कुछ लोगों ने बताया कि रास्ते में थोड़ी दूरी के लिए एक गाड़ी भी मिली लेकिन बाद में उसने भी उतार दिया।
Updated on:
16 May 2020 06:07 pm
Published on:
16 May 2020 06:05 pm
