
Prem Mandir
मथुरा। वृंदावन में बांके बिहारी से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है प्रेम मंदिर। कई एकड़ में फैला ये मंदिर भव्यता का उदाहरण है। अगर आप वृंदावन आए और प्रेम मंदिर नहीं देखा तो समझिए आपने बहुत कुछ मिस कर दिया। वैसे तो यहां हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, लेकिन पांच दिवसीय दीपोत्सव के दौरान इसकी रौनक पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। दीपावली पर इस मंदिर में खास इंतजाम किए गए हैं।
फूलों से बढ़ी मंदिर की भव्यता
दीपावली के इस मौके पर प्रेम मंदिर को फूलों की लड़ियों से सजाया गया है। वहीं मंदिर में स्थापित राधे कृष्ण और सीता राम की मूर्तियों का भी विशेष तरह से श्रृंगार किया गया है। ज्ञात हो कि दीपावली के दिन भगवान श्रीराम ने अन्याय और अत्याचार के ऊपर विजय प्राप्त की थी और अपने घर अयोध्या वापस लौटे थे। इसी खुशी में इस पर्व में घर घर दीपक रखने का चलन शुरू हुआ था। इस मान्यता को आगे बढ़ाते हुए मंदिर के लिए काफी संख्या में दीपों का इंतजाम किया गया है। दीपावली के दिन इस मंदिर की भव्यता को देखने दूर—दूर से सैलानी यहां आ रहे हैं।
मंदिर का इतिहास
प्रेम मंदिर को कृपालु जी महाराज ने बनवाया था। सन 2000 में प्रेम मंदिर का शिलान्यास हुआ और 15 फरवरी 2012 को जनमानस के लिए इस मंदिर को खोला गया। बताया जाता है कि इस मंदिर को बनने में करीब 11 वर्ष का समय लगा था। पूरी तरह सफेद पत्थरों से निर्मित इस मंदिर में इटैलियन संगमरमर का प्रयोग किया गया है। इसे बनाने के लिए उत्तर प्रदेश के अलावा राजस्थान से कारीगर बुलाए गए थे। मंदिर परिसर में प्रवेश करते है आपको राजस्थानी शिल्पकारी की झलक मंदिर की दीवारों में नजर आने लगेगी।
नक्काशीदार दीवारें और झांकियां हैं आकर्षण
मंदिर परिसर में झांकियों के माध्यम से बड़ी ही खूबसूरती से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया है। कालिया नाग पर विजय, गोपियों के साथ रास लीला और गोवर्धन पर्वत को उंगली पर उठाए कान्हा और सभी ब्रजवासियों की मूर्तियां इन झांकी में ऐसी प्रतीत होती हैं, जैसे थोड़ी ही देर में सजीव होकर कुछ बोल पड़ेंगी। वहीं सफेद संगमरमर से चमचमाती मंदिर की दीवारों पर बारी नक्काशी मंदिर की भव्यता में चार चांद लगाती है। बताया जाता है कि इस मंदिर के निर्माण में करीब 100 करोड़ रुपए की धनराशि खर्च हुई थी। मंदिर के ग्राउंड फ्लोर पर श्रीकृष्ण और राधारानी का मंदिर है तो पहली मंजिल पर सीता राम का मंदिर बना है। वहीं कृपालु जी महाराज की प्रतिमा लगी है जो देखने मे सजीव सी प्रतीत होती है।
रात का दृश्य होता यादगार
इस मंदिर की भव्यता रात में कई गुना अधिक बढ़ जाती है। रात में मंदिर की लाइटिंग कई रंग बदलती है। वहीं झांकियां भी एक्शन करती हुई नजर आती हैं। पूरा परिसर जगमगा उठता है। वहीं हर रोज शाम को करीब आधे घंटे का फाउंटेन शो होता है। कहते हैं कि रात में जो व्यक्ति इस मंदिर के एक बार दर्शन कर ले, वो जीवनभर इसकी भव्यता को नहीं भूल पाता।
क्यों है मंदिर का नाम प्रेम मंदिर
इस बारे में प्रेम मंदिर के पुजारी अजय बताते हैं किे इस मंदिर को बनाने का उद्देश्य लोगों को प्रेम का संदेश देना है। वास्तव में ब्रह्म श्याम सुन्दर का स्वरूप हैं। श्याम प्रेम के अधीन हैं, इसलिए इसका नाम प्रेम मंदिर रखा गया है। जो भी प्रेम के मार्ग पर चलता है उसको ईश्वर की प्राप्ति होती है।
Published on:
18 Oct 2017 10:50 am
