मथुरा। सुरक्षित रेल यात्रा का दावा करने वाली रेलवे के दावे की पोल उस वक्त खुल गयी जब महज़ एक महीने पहले चालू हुआ रेलवे स्टेशन पहला मॉनसून भी नहीं झेल पाया। बारिश के कारण रेलवे स्टेशन की इमारत धंस गयी तो फर्श पूरी तरह खंडित हो गया और दरार आ गयी। भ्रष्टाचार की परतें उखड़ीं तो रेल विभाग में हड़कंप मच गया और आनन फानन में मरम्मत का काम शुरू करा दिया।
ये है मामला
मथुरा अलवर रेल मार्ग पर बना राधाकुंड रेलवे स्टेशन एक महीने पहले ही बनकर तैयार हुआ था। लेकिन यह स्टेशन पहला मॉनसून भी नहीं झेल पाया। पिछले दिनों हुई बारिश ने इस इमारत में हुए काम की पोल खोलकर रख दी। बारिश के कारण स्टेशन की जमीन में दरार आ गई और पत्थरों से बना नया फर्श जमीन में धंस गया, जिसके बाद पूरा मामला सुर्खियों में आया तो रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया। आनन फानन में मजदूर बुलाए गए और मरम्मत का कार्य शुरू करा दिया।
आपको बता दें कि इस रेलवे स्टेशन को 15 करोड़ रुपए की लागत से बनाया गया था। इसको लेकर जब उप स्टेशन प्रबंधक देवीराम से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पिछले 26 जून को इसका उद्घाटन हुआ था लेकिन बारिश के कारण ये एक महीने के अंदर ही इसका फर्श धंस गया। इससे यात्रियों और यहां काम करने वाले रेल कर्मचारियों के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है।