मऊ. हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है, बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा। वाकई में दीदावर बड़ी मुश्किल से ही पैदा होते हैं। मऊ जिले के बीबीपुर गांव में भी एक ऐसा ही भारत मां का लाल पैदा हुआ, जिसने न सिर्फ पाकिस्तान जाने से मना कर दिया, बल्कि जब पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ अपनी तोपों के मुहाने खोल दिये तो भारत मां की रक्षा के लिये सबसे पहले अपनी जान की कुर्बानी देकर उनसे लोहा लिया। इतिहास उन्हें आजाद भारत के सबसे पहले शहीद और नौशेरा के शेर ब्रेगेडियर उस्मान के नाम से जानता है। मऊ जिले की खुशनसीबी है कि ब्रेगेडियर उस्मान जैसा देशभक्त जिले में पैदा हुआ। पर आज उन्हें जैसे भुला दिया गया है। जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन ने इस अमर शहीद की जन्मभूमि को उपेक्षित छोड़ दिया है। इससे देशभक्तों में कसक है।