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सरकार की उपेक्षा से चकनाचूर हो रहा इन खिलाड़ियों का सपना

मऊ जिला निवासी एथलिट रामानंद राजभर व हाॅकी खिलाड़ी मुकेश कुमार ने पत्रिका के साथ साझा किया अपना दर्द

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Athlete Ramanand Rajbhar and Hockey Player Mukesh Kumar

सरकार की उपेक्षा से चकनाचूर हो रहा इन खिलाड़ियों का सपना

मऊ.हालात से क्यूं हारें हमारे सितारे पत्रिका के इस खास मुहिम में आज हम दो ऐसे खिलाड़ियों कि बात कर रहे हैं जिनके दिल में विदेशों में भारत का झंडा बुलंद करने का जुनून तो है पर सुविधाओं का अभाव और सरकार की उपेक्षा उनके इस सपने पर पानी फेर रहा है। दोनों खिलाडियों को खेलते हुए देखकर बरबस लोगों के मुंह से यही निकलता है कि एक दिन ये दुनिया में भारत का नाम रोशन करेंगे। खिलाड़ी भी कहते हैं कि यदि उनको सुविधाएं मिले तो वह लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे। पर विडम्बना यह है कि हिम्मत व उम्मीद से भरे ये होनहार खिलाड़ी सरकारी उपेक्षा का शिकार हैं।

ये हैं 2013 में साउथ एशियन गेम्स में सौ और दो सौ मीटर की दौड में सिल्वर मेडल जीतने वाले रामानंद राजभर, जिन्हें जिले के खिलाड़ी अपना रोल माॅडल मानते हैं। जब इन्होंने 2013 में सिल्वर मेडल जीता था तो लोगों को उम्मीदें बढ़ गईं कि एक दिन यह देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर नाम रोशन करेंगे। पर न सिर्फ खिलाड़ियेां के बल्कि लोगों के भी सपने इसलिए तिल-तिल कर टूट रहे क्योंकि सरकारों ने इनकी तरफ से मुंह फेर लिया।

वीडियो में आप देख सकते हैं भीमराव अम्बेडकर स्टेडियम में प्रैक्टिस कर रहे इस खिलाड़ी को जिसका कहना है कि देश के लिए कुछ कर गुजरने के जज्बे को मैं हर पल जीता हूं। पर सिस्टम की बदहाली ने हमें पंगु बना दिया है। किसान के बेटे खिलाडी रामानंद राजभर पत्रिका से बातचीत में बताया कि सौ मीटर की रेस 10.26 सेकेंड में पूरा करने का इंडियन रिकार्ड है। जबकि वो 10.6 सेकेंड में सौ मीटर की रेस पूरा कर लेते हैं। वो बताते हैं कि साउथ एशियन गेम्स में उन्होने 10.6 सेकेन्ड में ही रेस को पूरा किया था।

उस गेम को याद करते हुए रामानंद बताते हैं कि इस गेम में 10.4 सेकेन्ड में श्रीलंका के खिलाडी ने 100 मीटर का रेस पूरा कर गोल्ड मेडल जीता था। रामानंद के इरादे चट्टान की तरह मजबूत हैं। उन्हें पूरा यकिन है कि वह देश के लिए गोल्ड मेडल जरूर जीतेंगे। पर उन्हें सरकार से शिकायत है कि सरकारों ने उन पर ध्यान नहीं दिया। खिलाडी जब गोल्ड जीतकर आते हैं तो उनका खूब सत्कार होता है। पर जब उन्हीं खिलाड़ियों को सुविधा की जरूरत होती है तो सरकारें मुुंह फेर लेती हैं।

यह शिकायत हाॅकी खिलाड़ी मुकेश कुमार को भी है। वह कहते हैं कि सरकार वादे तो करती है पर वादे पर खरा नहीं उतरती। नेशनल यूनिवर्सिटी गेम्स में कई बार जीत हासिल करने वाले इस खिलाड़ी को भी खेल को लेकर सरकार की उपेक्षा से रोष है। हाॅकी का यह खिलाडी पत्रिका से बातचीत में बताया कि हमें तो भर पेट खुराक भी नहीं मिल पाती। मुकेश ने बताया कि हमें ट्रेनिंग की भी अच्छी व्यवस्था मिल पाती है कि हम देश के लिए कुछ कर सकें। इनका ये भी कहना है कि खेल को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र व प्रदेश की सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन उसका क्या फायदा जब खिलाड़ियों को समय से ट्रेनिंग और खुराक की बेहतर व्यवस्था न मिल सके।

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