
संजय शर्मा,
मेरठ। देश की आजादी की पहली लड़ार्इ मेरठ से शुरू हुर्इ थी। इसकी एक-एक तारीख ने पूरे देश में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह पैदा कर दिया था। चर्बीयुक्त कारतूस को मुंह से खोलकर लोड करने से मना करने की बात ब्रिटिश सैन्य अफसरों को एेसी नागवार गुजरी कि उन्होंने इनका कोर्ट आॅफ मार्शल कराकर जेल में डाल दिया था। इसके बाद पूरे शहर में जैसे हाहाकार मच गया था, इसके बाद रातोंरात ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकने की पृष्ठभूमि तैयार हुर्इ। 10 मर्इ 1857 को रविवार की सुबह से ब्रिटिश सैन्य अफसरों के खिलाफ यह बिगुल एेसा बजा कि ब्रिटिश हुकूमत थराथरा गर्इ थी। इस प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का ही नतीजा था कि ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिलने लगी थी आैर हम 15 अगस्त 1947 को अपनी आजादी का जश्न मना सकें।
85 भारतीय सैनिकों का विद्रोह
1857 में कैंट क्षेत्र के तीसर हल्की अश्वरोही यूनिट के परेड ग्राउंड पर रोजाना सुबह पांच से सात बजे तक परेड होती थी। उस समय बंदूकों के लिए नए कारतूस का निर्माण किया गया था आैर उसे चलाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाना था। इसकी खास बात यह थी कि कारतूस के बारूद को चर्बीयुक्त ढक्कन से बंद किया गया था, जसे मुंह से खोलना था। 24 अप्रैल 1857 की सुबह अंग्रेज सैन्य अफसरों ने सभी सैन्य यूनिटों को इस ग्राउंड पर बुलाया आैर तीसरी हल्की अश्वरोही सैन्य यूनिट की टुकड़ी को इन कारतूसों के प्रशिक्षण के लिए इन्हें सर्व कराया।
इन कारतूसों के बारे में भारतीय सैनिकों ने कुछ सुन रखा था, इसलिए उन्होंने कारतूस को मुंह से लगाने से मना कर दिया था। ब्रिटिश सैन्य अफसरों ने तार द्वारा चंडीगढ़ स्थित हेडक्वार्टर से बातचीत की आैर वहां से फौरन आदेश मिला कि मना करने वालों को तुरंत गिरफ्तार करके कोर्ट आफ इन्क्वायरी बिठार्इ जाए। 85 भारतीय सैनिकों को इसी परेड ग्राउंड से गिरफ्तार कर लिया गया। 6, 7 व 8 मर्इ 1857 को कोर्ट आफ इंन्क्वायरी पूरी हुर्इ। तब तक इन गिरफ्तार सैनिकों को कैंट की कार्बाइनर्स मेस में रखा गया।
बंदी सैनिकों को शहर में घुमाया
9 मर्इ शनिवार को सेंट जोंस चर्च के पास मेन परेड ग्राउंड पर इन भारतीय सैनिकों को लाया गया। यहां अन्य सैन्य यूनिटों के जवान आैर अफसर थे। कमांडिंग अफसर कर्नल माइकल स्मिथ ने इन 85 भारतीय सैनिकों का कोर्ट मार्शल आैर 10-10 साल के सश्रम कारावास की सजा का निर्णय सुनाया। इन सैनिकों की वर्दी छीन उतरवा दी गर्इ। तब भारतीय सैनिकों ने कमांडिंग अफसर को खूब खरीखोटी सुनार्इ। कमांडिंग अफसर ने शहर व कैंट के लोगों पर डर बिठाने के लिए इन सैनिकों को पूरे शहर में घुमवाया। ये जहां से भी निकले, लोगों में बेहद गुस्सा था आैर वे भारतीय सैनिकों की जयकार कर रहे थे। बाद में इन्हें विक्टोरिया पार्क स्थित जेल में बंद कर दिया गया।
पूरी रात नहीं सोया शहर
भारतीय सैनिकों की हालत देखकर शहर के लोग पूरी रात नहीं सोए थे। इस दौरान जगह-जगह बैठकें हुर्इ आैर अंग्रेज सैन्य अफसरों के खिलाफ रणनीति तैयार की गर्इ। भारतीय सैनिकों के साथ हुए दुर्व्यवहार को सहन नहीं कर पा रहे थे। फिर एेसी रणनीति तैयार करके इस पर काम शुरू किया गया, जिसकी भनक अंग्रेज अफसरों को बिल्कुल भी नहीं लग पार्इ। अगले दिन 10 मर्इ को रविवार था। बस इसी को ध्यान में रखकर भारतीयों ने मजबूत जवाब देने की ठान ली थी।
अंग्रेज अफसरों में मच गया हड़कंप
रविवार को छुट्टी का दिन था। कुछ अंग्रेज सैन्य अफसर परिवार के साथ चर्च गए हुए थे, तो कुछ घर में आैर कुछ परिवार के साथ बाजार घूमने निकले थे। हजारों की भीड़ ने अपने हाथों में लाठी-डंडे व अन्य हथियार लेकर अफसरों के बंगलों पर आक्रमण कर दिया। अंग्रेज अफसरों को एेसी उम्मीद नहीं थी, यह देखकर वे डर गए आैर इधर-उधर भागने लगे। उनकी पत्नियों व बच्चे बंगलों में छुप गए। भीड़ में इतना गुस्सा था कि उन्होंने किसी को नहीं बख्शा आैर जो अफसर जहां था वहीं उसे मौत के घाट उतार दिया। इस विद्रोह में यहां तैनात अधिकतर ब्रिटिश अफसर को मारने के बाद ये लोग पहले केसरगंज जेल आैर फिर विक्टोरिया पार्क जेल पहुंचे आैर सभी भारतीय सैनिकों व अन्य बंदियों को मुक्त कराया।
दिल्ली चलो का नारा दिया
सेना के हेडक्वॉर्टर को इसकी जानकारी मिल गर्इ थी। शाम के समय काफी संख्या में लोग एकत्र हुए आैर राताें रात दिल्ली जाकर लालकिले पर झंडा फहराने का निर्णय लिया गया। यहां 'दिल्ली चलो' का नारा भी दिया गया। सभी यहां से दिल्ली पैदल निकल गए आैर सुबह के समय वहां पहुंचकर लालकिले पर झंडा फहरा दिया। उस समय मुगल साम्राज्य के आखिरी बादशाह बहादुर शाह जफर दिल्ली की गद्दी पर थे।
विद्रोह की आग फैली देशभर में
मेरठ में इस ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का असर यह हुआ कि जनपद के आसपास के गांवों में यह विद्रोह शुरू होकर अन्य शहरों, राज्यों में फैल गया। ब्रिटिश राज के खिलाफ इस विद्रोह से ब्रिटिश अफसर हिल गए थे आैर तब 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने की नींव रखी गर्इ थी।

Published on:
14 Aug 2017 04:45 pm

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