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कोरोना संकट के कारण शिशुओं के टीकाकरण अभियान पर ग्रहण, अभिभावकों की बढ़ी परेशानी

Highlights कोरोना संक्रमण के कारण टीकाकरण अभियान बीच में ही रुका सरकारी अस्पतालों का स्टाफ कोरोना की रोकथाम में जुटा हुआ सामान्य दिनों में रोजाना एक हजार से ज्यादा बच्चों का टीकाकरण  

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meerut

मेरठ। कोरोना संकट के कारण जारी लॉकडाउन से जहां तमाम चीजों पर बंदिश लग गई है, वहीं जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में रूटीन बीमारियों का भी इलाज नहीं हो पा रहा है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है मासूमों को, जिनका नियमित टीकाकरण लॉकडाउन के कारण बंद हो गया है। सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण बंद है और निजी डॉक्टरों ने मौका देखकर फीस इतनी बढ़ा दी है कि गरीबों के लिए ये पहुंच से बाहर हैं।

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शिशुओं में तमाम बीमारियों को रोकने के लिए सरकार वृहद स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाती है। इसके अलावा जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और अन्य सरकारी अस्पतालों में भी नवजात बच्चों का मुफ्त में टीकाकरण किया जाता है। सवा महीने से लेकर पांच साल तक के बच्चों को इन अस्पतालों में मुफ्त टीके लगाए जाते हैं। इसके अलावा हर सप्ताह इसके लिए कैंप भी लगाए जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक जिले में रोजाना एक हजार से ज्यादा बच्चों का टीकाकरण विभिन्न सरकारी अस्पतालों और मेडिकल में किया जाता है। बीते सवा महीने से सरकारी अस्पतालों में टीकाकरण का कार्य बिल्कुल बंद है। ऐसे में मजबूरीवश अभिभावकों को निजी डॉक्टरों का रुख करना पड़ रहा है। रजबन निवासी एक दंपति ने बताया कि एक डॉक्टर ने उनके सवा माह के बेटे के टीकाकरण के लिए तीन हजार रुपये मांगे। वह फिलहाल इतने पैसे खर्च कर सकते।

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वहीं इस संबंध में जब मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा. आरसी गुप्ता से बात की गई तो उनका कहना था कि टीकाकरण फिलहाल पूरी तरह बंद है। उसकी बड़ी वजह है स्टाफ की कमी होना। सब कोरोना मरीजों के उपचार में लगा है। वहीं इस संबंध में सीएमओ से बात करने पर उन्होंने जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. विश्वास चौधरी से बात करने को कहा। डा. विश्वास चौधरी ने बताया कि शासन की ओर से दो हफ्ते के लिए वैक्सीनेशन पर रोक लगाई गई थी। जिसे आज से शुरू होना था, लेकिन फिलहाल इसको लेकर कोई आदेश नहीं आया है। ऐसे में इस बारे में कुछ भी कहना संभव नहीं है।

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