
बागपत. यहां के एक गांव में हाईकोट ने मुस्लिमों के शव दफन करने पर रोक लगा दी हैं। 24 साल बाद आये इस फैसले से गांव में तनाव का माहौल है। लेकिन जिला प्रशासन ने अपनी कागजी कारवाई पूरी कर उनके तनाव पर भी विराम लगा दिया है और शव दफन न करने को कहा है। प्रशासन ने साफ कहा है कि हाईकोट के फैसले के खिलाफ अगर किसी ने कदम बढाया तो प्रशासन उसके साथ सख्ती से पेश आयेगा।
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दरसल, मामला बागपत जनपद के बासौली गांव का है। जहां वर्ष 1994 में तालाब की 13 बीघा भूमि पर कब्रिस्तान दर्शाकर उस पर कब्जा कर लिया गया था। बताया जाता है कि अभिलेखों में भी यह भूमि कब्रिस्तान दर्शा दी गई थी। लेकिन गांव के एक बीडीसी मेंबर ने यह मामला अधिकारियों के सामने उठाया। जिलाधिकारी से लेकर कमिश्नर तक इस तालाब की शिकायत की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद यह ममला हाईकोट चला गया। अब हाईकोट से फैसला आया है कि यह तालाब की भूमि है और इस पर तालाब की बनाया जाए।
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कोर्ट के इस फैसले से मुस्लिम समुदाय में रोष व्याप्त है । हालांकि, ग्राम प्रधान रीना तोमर का कहना है कि गांव में इस विवादित तालाब के आलावा भी ढाई बिघा में कब्रिस्तान है। गांव में कोई विवाद नहीं है। तालाब की भूमि से भी कोई शव नहीं उखाड़े जाएंगे। लेकिन यह भूमि अब तालाब की भूमि ही कहलाएगी। इसके लिए प्रशासन को भी अवगत करा दिया गया है। वही, एडीएम लोकपाल सिंह ने गांव में किसी तरह के तनाव से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि हाईकोट के फैसले का हर हाल में सम्मान किया जाएगा।
Published on:
08 Apr 2018 03:52 pm
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