यह है पूजा विधि
कलश के ऊपर रोली से ऊं व स्वास्तिक बनाने से पूर्व कलश के मुख पर शुभ कलावा बांधें। जल में सतोगुणी हल्दी की तीन गांठें और 12 रेशे केसर के साथ अन्य जड़ी बूटियां व पंच रत्न चांदी अथवा तांबे इत्यादि के सिक्के के साथ गंगा जल, लौंग के साथ गंगाजल से कलश को पूरी तरह से भर दें। मुख पर पंच पल्लव अर्थात पीपल, बरगद, गुल्लर व पाकर के पत्ते जो पंच तत्वों का प्रतीक हैं, इस प्रकार रखें कि डंडी पानी में भीगी रहे तथा पत्ते बाहर रहें। नौ दिन अखंड दीप, अखण्ड ज्योति सभी प्रकार की अमंगलकारी ऊर्जाओं को नष्ट करने की क्षमता रखती है।