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कैसा हुआ था मेरठ में 1952 का पहला विधानसभा चुनाव

एक अनोखी बात भी हुई थी तीन सीटों पर चुनावों में

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Rajkumar Pal

Jan 11, 2017

meerut election in 1952

meerut election in 1952

संजय श्रीवास्तव, मेरठ। ये मेरठ में आजादी के बाद पहला चुनाव था। लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हो रहे थे। माहौल किसी मेले की तरह था। स्वतंत्रता का जोश चुनावों पर साफ नजर आ रहा था। भीड़ उमड़ी चली आ रही थी। कोई ताकत का प्रदर्शन नहीं। कोई लड़ाई झगड़ा नहीं। लेकिन उस चुनाव में एक अनोखी बात भी हुई थी।

कितनी विधानसभा सीटें

मेरठ उस चुनाव में सबसे बड़ा ऐसा जिला था, जहां 15 विधानसभा सीटें थीं। इतनी सीटें शायद किसी और जिले में तब रही हों। गाजियाबाद, हापुड़ तब मेरठ जिले की तहसीलें थीं। लेकिन 15 सीटों में तीन सीटें अनोखी थींं। यानि ये सीटें थीं, जहां से एक नहीं दो उम्मीदवारों को चुनकर भेजा जाना था। इन तीन सीटों पर सुरक्षित उम्मीदवार भी चुने जाने थे। सुरक्षित सीटों पर अलग उम्मीदवार खड़े करने की बात उस चुनाव के बाद नहीं दोहराई गई।

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सभी 18 कांग्रेेसी उम्मीदवार जीते

सभी सीटों पर कांग्रेसी उम्मीदवार भारी भरकम वोटों से जीते। जनता ने कांग्रेस को 55 फीसदी वोट दिए। दरअसल तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का कद न केवल तब बहुत बड़ा था बल्कि उन्हें लेकर तब कोई विवाद भी नहीं था। कांग्रेस के बाद निर्दलियों को 21 फीसदी वोट मिले। आमतौर पर निर्दलीय वो उम्मीदवार थे, जो कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर बगावत करके चुनाव में उतरे। उन्हें अपने समुदाय या जाति का खासा समर्थन भी मिला। जनसंघ को 4.8 फीदी वोट मिले।

सामान्य सीटों पर किस पार्टी से कितने उम्मीदवार

कांग्रेस -15 उम्मीदवार
जनसंघ -10 उम्मीदवार
किसान मजदूर प्रजा पार्टी -10 उम्मीदवार
सोशलिस्ट पार्टी -08 उम्मीदवार
कम्युनिस्ट पार्टी -02 उम्मीदवार
राम राज्य परिषद -02 उम्मीदवार
निर्दलीय -40 उम्मीदवार

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क्यों जीती कांग्रेस

- नेहरू का प्रभाव खासा ज्यादा था
- रिकार्ड और संगठन स्तर पर भी कांग्रेस मजबूत थी
- लोग उन्हें आजादी दिलाने वाली पार्टी के रूप में देखते थे
- मुसलमानों ने समर्थन दिया
- हिन्दुओं के वोट भी खूब मिले

किसे कितने फीसदी वोट

कांग्रेस -55 प्रतिशत
निर्दलीय -21 प्रतिशत
सोशलिस्ट -9.2 प्रतिशत
केएमपीपी -07 फीसदी
जनसंघ -4.8 फीसदी
कम्युनिस्ट -0.7 फीसदी

09 सीटों पर जनसंघ, 08 सीटों पर केएमपीपी, 05 पर सोशलिस्ट, 02 पर राम राज्य परिषद और 34 सीटों पर निर्दलियों की जमानत जब्त हुई

क्या जाति और धर्म का प्रभाव था

- जाति और धर्म का असर इन चुनावों में नाममात्र का था
- जो कुछ था भी वो निर्दलीय प्रत्याशियों तक सीमित रहा।

क्या गड़बड़ियां हुई थीं

- आमतौर पर चुनाव शांतिपूर्ण थे
- एक पार्टी ने गड़बड़ी की कोशिश की थी लेकिन अधिकारियों ने उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की
- जिला प्रशासन निष्पक्ष और पारदर्शी रहा
- नतीजे आने के बाद बैलेट बॉक्सों से छेड़छाड़ का आरोप लगा लेकिन इसकी कोई पुष्टि नहीं हो सकी।

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