मेरठ उस चुनाव में सबसे बड़ा ऐसा जिला था, जहां 15 विधानसभा सीटें थीं। इतनी सीटें शायद किसी और जिले में तब रही हों। गाजियाबाद, हापुड़ तब मेरठ जिले की तहसीलें थीं। लेकिन 15 सीटों में तीन सीटें अनोखी थींं। यानि ये सीटें थीं, जहां से एक नहीं दो उम्मीदवारों को चुनकर भेजा जाना था। इन तीन सीटों पर सुरक्षित उम्मीदवार भी चुने जाने थे। सुरक्षित सीटों पर अलग उम्मीदवार खड़े करने की बात उस चुनाव के बाद नहीं दोहराई गई।