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Swachh Bharat Mission in Meerut : कूड़े के पहाड़ नालों की गंदगी क्रांतिधरा की पहचान, ये है सुंदर स्वच्छ मेरठ का हाल

Swachh Bharat Mission in Meerut सुंदर और स्वच्छ की असली तस्वीर देखनी हो तो महानगर की पॉश कालोनियों के अंदर का भ्रमण करें। जहां की बजबजाती गंदगी मेरठ नगर निगम को नहीं दिखाई देती। पॉश कालोनियों में कूड़े के ढेर पहाड में तब्दील हैं और नालों में गंदगी उफना रही है। जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की पोल खोल रही है। आमतौर पर ये हाल मेरठ के अधिकांश इलाकों का है।

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मेरठ

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Kamta Tripathi

Jul 15, 2022

Swachh Bharat Mission in Meerut : कूड़े के पहाड़ नालों की गंदगी क्रांतिधरा की पहचान, ये है सुंदर स्वच्छ मेरठ का हाल

Swachh Bharat Mission in Meerut : कूड़े के पहाड़ नालों की गंदगी क्रांतिधरा की पहचान, ये है सुंदर स्वच्छ मेरठ का हाल

Swachh Bharat Mission in Meerut सन 2021 में मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स द्वारा देश के 4,203 महानगरों की स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में प्रदेश के स्वच्छ महानगरों में मेरठ को छठां स्थान मिला था। वहीं देश के स्वच्छ महानगरों की सूची में मेरठ 27वें स्थान पर था। महानगर में धरातल पर भले ही स्वच्छता न दिखाई दे रही हो लेकिन सरकार द्वारा जारी रैंकिंग सूची के आधार पर मेरठ ने स्वच्छता में काफी अच्छा कार्य किया था। लेकिन एक साल के बाद मेरठ अपनी इस रैकिंग को क्या बरकरार रख पाएगा। जिस तरह से गंदगी महानगर में फैली है। उसको देखकर तो नहीं लगता कि देश के स्वच्छता रेटिंग में मेरठ अपना ये स्थान बरकरार रख पाएगा। महानगर के पॉश इलाकों और सड़क के किनारे गंदगी के ढेर फैले हुए हैं। जहां पर आवारा जानवरों का राज रहता है। ये आवारा जानवर कभी—कभी सड़कों पर आकर वाहन चालकों को सड़क हादसों का शिकार भी बना देते हैं।


हर इलाके में पसरी गंदगी
महानगर के हर इलाके में गंदगी पसरी हुई है। जिससे संक्रमण का खतरा बना हुआ है। मेरठ के पॉश इलाके शास्त्रीनगर, मंगलपांडे नगर, गंगानगर, जागृति विहार,पल्लवपुरम, कंकरखेड़ा आदि का गंदगी से बुरा हाल है। गंदगी के पास से निकलने में जहां छात्रों और महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं इनसे बीमारी और संक्रमण फैलने का भी खतरा रहता है।

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शास्त्रीनगर में बने कूड़े के पहाड़
शास्त्रीनगर में तो कूड़े के ढ़ेर के बड़े—बड़े पहाड़ बने हुए हैं। तेज हवा चलने पर ये कूड़ा उड़कर लोगों के घरों में पहुंच जाता है। हैरानी की बात है कि महानगर में बजबजाती गंदगी ना तो निगम अधिकारियों केा दिखाई देती है और ना प्रशासनिक अधिकारियों को। बदलते मौसम के चलते तरह-तरह की बीमारियों ने जन्म लेना शुरू कर दिया यह बीमारियां लाइलाज होती जा रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण जगह-जगह कूड़े का अंबार और बजबजाते नाले और नालियां लोगों को बीमारी का शिकार बना रही हैं। क्षेत्रीय पार्षद क्षेत्रीय लोगों के शिकायत करने के बावजूद नगर निगम अधिकारियों का बहाना बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। सारा आरोप नगर निगम सफाईकर्मियों और कर्मचारियों—अधिकारियों पर मढ़ देते हैं। इससे जहां क्षेत्रीय जनता में आक्रोश है वहीं महामारी के काल में जनता समाने के लिए मजबूर है।