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प्रधानमंत्री कृषि योजना से किसान कर रहे पानी की बचत, ऐसे ले सकते हैं फायदा

भारत सरकार ने किसानों के लिए प्रधानमंत्री कृषि योजना लागू की है। जिसके अंतर्गत अब किसान पानी की खपत कम कर उन्नत खेती कर सकते हैं।

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मेरठ

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Rahul Chauhan

Jul 04, 2018

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प्रधानमंत्री कृषि योजना से किसान कर रहे पानी की बचत, ऐसे लें सकते हैं फायदा

बागपत। देश भर के कुछ स्थानों को अगर छोड दिया जाए तो पानी की किल्लत से सरकार परेशान है। एक ओर खेती के लिए पानी की व्यवस्था तो दूसरी ओर पीने के पानी का दोहन रोकना सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। जिसे देखते हुए भारत सरकार ने किसानों के लिए प्रधानमंत्री कृषि योजना लागू की है। जिसके अंतर्गत अब किसान पानी की खपत कम कर उन्नत खेती कर सकते हैं।

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इस योजना से पानी और बिजली दोनों की खपत कम होती है तथा किसानों को लाभ भी पहुंच रहा है। किसानों को पानी खपत कम करने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा कृषि सिंचाई लागू किए जाने से किसान ‘माईक्रोइरीगेशन कार्यक्रम’ के अंगतर्गत ड्रिप एंव स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली का लाभ ले रहे हैं। इस सिंचाई प्रणाली को अपनाकर 40 से 50 प्रतिशत पानी की बचत होती है और फसल की गुणवत्ता भी बढ जाती है।

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क्या है ड्रिप सिंचाई

बता दें कि इस विधि के माध्यम से फसलों को बूंद-बूंद पानी पहुंचाया जाता है। जिससे पौधों की जडों में नमी बनी रहती है और पानी की लागत कम हो जाती है। भारत सरकार के ऑपरेशनल गाईडलाइन्स 2017 के अनुसार बागवानी, कृषि एवं गन्ना फसल में अधिक दूरी एवं कम दूरी वाली फसलों के 14 विभिन्न लेटरेल स्पेसिंग के आधार पर उपयुक्त फसलों में ड्रिप सिंचाई पद्धति को लगाकर उन्नतिशील उत्पादन एवं जल संचयन किया जा सकता है।

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स्प्रिंकलर सिंचाई से लाभ

किसान सब्जी से लेकर फूल और औषधीय खेती पर इस सिंचाई का लाभ ले सकते हैं। मटर, गाजर, मूली, विभिन्न प्रकार की पत्तेदार सब्जियां, दलहनी फसलें, तिलहनी फसलें, अन्य कृषि फसलें, औषधीय एवं सुगंध फसलों में मिनी स्प्रिंकलर, माइक्रो स्प्रिंकलर, सेमी परमानेन्ट, पोर्टेबल एवं लार्ज वैक्यूम स्प्रिंकलर (रेनगन) द्वारा सरलता से सिंचाई प्रबन्धन किया जा सकता है। जिससे पानी की खपत तो कम होती ही है साथ ही फसलों में कीडे का प्रकोप भी कम हो जाता है।

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किसानों को दी जाती है जानकारी

बागपत में कृषि विभाग द्वारा कई बार किसान मेलों का आयोजन किया जाता है। जिसमें किसानों को इस योजना के बारे में जानकारी दी जाती है। कलेक्ट्रैट पर तीन दिवसीय मेले में इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों ने अपना पंजीकाण कराया और लाभ भी उठाया है।

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ऐसे लें योजना का लाभ

किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए अपना नलकूलप, तालाब, या पानी का स्रोत होना आव्श्यक है। इसके साथ-साथ कृषक के पास स्वयं की भूमि होना भी जरूरी है। एक लाभार्थी कृषक संस्था को उसी भू-भाग पर दूसरी बार 7 वर्ष के पश्चात ही योजना का लाभ दिया जा सकता है। खेकडा के एक किसान धूम सिह चौधरी ने इस योजना का लाभ लिया है और पानी की खपत कम कर सबजी की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस प्रणाली से पानी की खपत तो कम होती ही है। साथ ही फसलों की धुलाई हो जाने से फसल अच्छी और निरोगी भी होती है।

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कैसे करायें पंजीकरण

किसान योजना का लाभ लेने के लिए यूपी एग्रीकल्टर डॉट काम पर जाकर योजना पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराकर प्रथम आवक प्रथम पावक के सिंद्धात पर योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। पंजीकरण के लिए किसान के पहचान हेतु आधार कार्ड, भूमि की पहचान हेतु खतौनी एवं अनुदान की धनराशि के अन्तरण हेतु बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ की छाया प्रति जरूरी है।

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अनुदान भुगतान

निर्माता फर्मां के स्वयं मूल्य प्रणाली के आधार पर भारत सरकार द्वारा निर्धारित इकाई लागत के सापेक्ष जनपद स्तरीय समिति द्वारा भौतिक सत्यापन के उपरान्त अनुदान की धनराशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांस्फर (डी.वी.टी.) द्वारा सीधे लाभार्थी के खाते में अन्तरित की जायेगी।

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क्या कहते हैं अधिकारी

जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह का कहना है कि सरकार की इस योजना को किसानों तक पहुंचाने के लिए विभागीय अधिकारी बैठकों और मेलों के माध्यम से किसानों को जानकारी दे रहे हैं। जनपद में 50 से ज्यादा किसानों ने इस योजना में पंजिकरण कराया है और किसान इसका लाभ भी उठा रहे हैं। इस योजना का अगर किसान ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करेंगे तो बागपत के गिरते जल स्तर को रोकने में काफी हद तक सहायता मिलेगी।

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