
मेरठ। कोरोना महामारी (coronavirus) के इस दौर में किसी भी तरह के वायरस और बैक्टीरिया (bacteria) से सुरक्षित रहने की अहमियत सभी ने समझ ली है। हालांकि, इस दौरान एक बात की अनदेखी अक्सर लोग कर देते हैं, वह है चश्मे के लेंस पर आने वाले बैक्टीरिया और वायरस। इस संबंध में आई स्पेशलिस्ट डा संदीप मित्तल ने बताया कि चश्मे (specs) पर आने वाले वायरस और बैक्टीरिया से बचना भी बहुत जरूरी है। एंटीवायरस लेंस इसमें मददगार हो सकता है। हवा में मौजूद बहुत से वायरस व बैक्टीरिया चश्मे पर चिपक जाते हैं, जो आंखों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं।
उन्होंने बताया कि इससे आंखें लाल होने के साथ खुजली भी हो सकती है। कहीं कहीं तो ये कंजेक्टिवाटिस भी हो सकता है। इसको नजर अंदाज न करें वरना परेशानी बढ़ भी सकती है। चश्मे के संक्रमित होने से कंजेक्टिवाइटिस आंख के अंदर के सफेद भाग का संक्रमित कर देता है। यह वायरस और बैक्टीरिया दोनों से होता है। एक बार आंख में जाने पर यह रोग तेजी से फैलता है क्योंकि आंख की ये परिस्थिति इन वायरस और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल होता है। मुख्य रूप से यह रोग तीन से चार दिन तक रहता है किंतु कई बार इसका संक्रमण सात दिनों तक चलता है।
मेरठ मेडिकल कालेज में नेत्र रोग विभाग के विभागध्यक्ष रहे डा0 संदीप मित्तल ने बताया कि इससे आंखों में कंजेक्टिवाइटिस हो जाती है। जिसकी उपेक्षा खतरनाक हो सकती है। इलाज न कराने से कार्नियल अल्सर की समस्या भी हो सकती है। आंख में माड़ा पड़ जाता है और दिखना बंद हो जाता है। संक्रमण अधिक होने पर पूरी आंख में फैल जाता है जिसे एंडआप्थैलमाइटिस कहते हैं। इसमें काफी गंभीर स्थिति हो जाती है। उन्होंने कहा कि अगर चश्मा लगाते हैं तो सावधान रहना होगा। खासकर ऐसे माहौल में जबकि कोरोना संक्रमण और ब्लैक फंगस का खतरा हो। ऐसे में आंख में लगाने वाला साधारण सा चश्मा भी कंजेक्टिवाइटिस का कारण बन जाता है। अगर ऐसा होता है तो बिना डॉक्टर की सलाह के इलाज नहीं करना चाहिए और स्टेरायड आई ड्राप का इस्तेमाल तो करना ही नहीं चाहिए।
Published on:
10 Jul 2021 04:11 pm

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