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VIDEO: रिहाइशी कालोनी के चारों ओर जहरीला धुंआ उगल रही अवैध रूप से बनी फैक्ट्रियां, सीएम योगी तक पहुंचा मामला

Highlights: -मेरठ सहित एनसीआर में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण के बाद भी सतर्क नहीं हुआ प्रदूषण विभाग -अधिवक्ता ने सीएम से लेकर डीएम तक की शिकायत -अधिवक्ता का आरोप, प्रदूषण विभाग ने कागजी खानापूर्ति कर बंद की फाइल

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मेरठ

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Rahul Chauhan

Nov 22, 2019

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मेरठ। दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ रहे वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण की गवाह गढ़ रोड पर राजवंश विहार आवासीय कॉलोनी भी है। जहां पर अवैध रूप से ही फैक्ट्रियां संचालित की जा रही हैं। एक तरफ तो प्रदूषण विभाग छापेमारी की कार्रवाई कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर जहरीला धुआं उगल रही फैक्ट्रियां इस महकमे के अधिकारियों को दिखाई नहीं दे रही जो कि वायु और जल प्रदूषण को लगातार क्षेत्र में फैला रही हैं। राजवंश विहार के आसपास करीब दो लाख की आबादी है।

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लोगों की मानें तो इस कालोनी के आसपास फैैक्ट्रियों से निकल रहे धुएं और दूषित जल के कारण क्षेत्र में प्रदूषण की स्थिति काफी विकराल रूप धारण कर चुकी है। कुछ फैक्ट्रियों में भूमि में बोरिंग करके प्रदूषित जल को छोड़ा जा रहा है और कुछ व्यक्तियों के द्वारा खुले में प्रदूषित जल फैलाया जा रहा है। जिस कारण उस क्षेत्र का भूमिगत जल पीने योग्य नहीं रह गया है। निवासियों की मानें तो पानी को थोड़ी देर ही रखने पर पानी का रंग हल्का लाल होने लगता है और पानी में बदबू आने लगती है। अगर इस पानी का सेवन करने पर शरीर में एलर्जी की भी शिकायत यहां के लोगों को हो रही है।

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उपरोक्त के संदर्भ में अधिवक्ता रामकुमार शर्मा द्वारा पर्यावरण मुख्यालय, मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव को शिकायत प्रेषित की गई थी। इसके बाद एक टीम पारसनाथ अभियंता पर्यावरण के नेतृत्व में आई थी। जिसने जांच की थी। उपरोक्त के संदर्भ में जब क्षेत्रीय प्रदूषण कार्यालय से संपर्क किया गया तो क्षेत्रीय प्रशासन ने कहा कि कार्रवाई चल रही है। जल्द निस्तारण हो जाएगा। लेकिन, मेरठ प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय ने कागजी तौर पर इसका निस्तारण किया। जबकि आज भी फैक्ट्रियों से धुआं जहर उगल रहा है।

अधिवक्ता रामकुमार शर्मा का आरोप है कि मात्र कागजी खानापूर्ति के लिए धन बल का उपयोग करते हुए उपरोक्त फैक्ट्री मालिकों ने लगातार जल और वायु प्रदूषण में अग्रणी भूमिका निभाई जा रही है। इस संबंध में डीएम मेरठ को भी लगातार अवगत कराया गया था। लेकिन वहां भी कोई कार्रवाई नहीं हुई । इस बारे में जब डीएम अनिल ढीगरा से बात की गई तो उनका कहना था कि इसकी जांच के लिए प्रदूषण विभाग को लिखा गया है। संबंधित विभाग जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रेषित करेगा।

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