
मेरठ। पिलखुवा में लाखन गांव के किसान प्रदीप तोमर की पुलिस पिटाई से हुई मौत का मामला तूल पकड़ गया है। किसान संगठनों के बाद अब ठाकुर समाज के लोग भी इस हत्या के विरोध में लामबंद हो गए हैं। ठाकुर समाज ने पीडि़त परिवार को न्याय दिलाने की मांग करते हुए योगी सरकार को आंदोलन की खुली चेतावनी दी है।
शास्त्रीनगर स्थित ठाकुर भवन में हुई पंचायत में ठाकुर समाज ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि लाखन निवासी प्रदीप तोमर की पिलखुवा पुलिस की कस्टड़ी में पीट-पीटकर इलेक्ट्रिक शॉक से हत्या कर दी गई। जबकि मृतक का कोई अपराध नहीं था। उस पर जबरन एक हत्या के मामले में हत्या कबूल करने का दबाव बनाया जा रहा था। मृतक ने विरोध किया तो दोषी पुलिस वालों ने उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी। आरोप लगाया कि 'जयचंद' बने स्थानीय नेताओं एवं एडीजी मेरठ जोन एवं मेरठ मंडल कमिश्नर ने सरकार की बदनामी और प्रदेश सरकार की नाकामयाबी को दबाने के लिए मृतक के परिजनों पर जबरन दबाव बनाया और 25 लाख रुपये में समझौता करा दिया।
महासभा में कहा गया कि यह बड़े दुख का विषय है कि प्रदेश में आए दिन हत्याएं हो रही हैं। चाहे वह लखनऊ निवासी विवेक तिवारी हो या फिर झांसी का पुष्पेंद्र यादव या फिर हापुड़ का प्रदीप तोमर हत्याकांड हो। जनता का उप्र पुलिस और सरकार से विश्वास उठ चुका है। जब चाहे पुलिस वाले किसी भी निर्दोष व्यक्ति की इरादतन हत्या कर देते हैं। योगी राज में पुलिस वालों के हौसले तो बुलंद हैं लेकिन जनता का पुलिस से विश्वास उठ चुका है।
ठाकुर समाज की पंचायत ने सर्वसम्मति से एक पत्र सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को लिखकर भेजा है। जिसमें उनसे इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई है। उन्होंने प्रधान न्यायाधीश से मांग की है कि उप्र सरकार और पुलिस प्रशासन की निर्दयता के खिलाफ आवाज उठाने वाले हर व्यक्ति को प्रदेश पुलिस और सरकार कुचलने का प्रयास कर रही है। उसे झूठे मुकदमे में फंसा रही है। ऐसी स्थिति में प्रदेश की जनता सरकार और पुलिस से डरी हुई है।
Published on:
16 Oct 2019 02:24 pm

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