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मेरठ. नवरात्र में सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। सबकी अलग-अलग मान्यता है, उसी हिसाब से मंदिरों में कहीं कुछ कम, कहीं कुछ ज्यादा भीड़ है। श्रद्धालु यहां आकर पूजा-अर्चना और दान करते हैं। शहर मे एक मंदिर एेसा भी है, जहां चढ़ावे व दान में आए एक-एक पैसे का हिसाब देना पड़ता है आैर उस हिसाब से मंदिर ट्रस्ट इनकम टैक्स भी देती है। इनकम टैक्स देने की धनराशि एक लाख रुपये से ज्यादा भी दी जाती है। पिछले वर्ष मंदिर ने सरकार को 72 हजार रुपये इनकम टैक्स अदा किया था। मां मंशा देवी मंदिर में आने वाले श्रद्धालुआें की संख्या बताती है कि इस मंदिर की उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों में कितनी मान्यता है। त्योहारी दिनों में इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुआें की संख्या बढ़ जाती है।
दूर-दूर तक प्रसिद्धि
मां मन्शा देवी मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक होने के कारण यहां काफी लोग आते हैं। इस मंदिर का ट्रस्ट बनने के बाद मंदिर का हिसाब-किताब सही रहे आैर कोर्इ विवाद न खड़ा हो जाए, इसलिए हर साल यहां की आमदनी का आॅडिट करवाया जाता है आैर जितनी आमदनी होती है, उसका इनकम टैक्स हर साल जमा करवाया जाता है। मंदिर के मुख्य पुजारी भगवत गिरि का कहना है कि 1992 से मंदिर इनकम टैक्स दे रहा है। एक रुपये में 31 पैसे के हिसाब से इनकम टैक्स दिया जाता है। यहां आने वाले डोनेशन आैर चढ़ावे की धनराशि से इसी हिसाब से इनकम टैक्स तय होता है। इसी के तरह मंदिर के पुजारी भी इनकम टैक्स भरते हैं। ट्रस्ट से यह सेलेरी उन्हें मिलती है। बीच-बीच में मंदिर में आॅडिट भी होता है।
मंदिर में होते हैं भंडारे
मां मंशा देवी मंदिर में सच्चे दिल से मांगी गर्इ मनोकामना पूरी होती है। मनोकामना पूरी होने के बाद यहां भंडारा कराने का भी विशेष महत्व है। इसके लिए श्रद्धालु वापस लौटकर भंडारा जरूर करता है। इस मंदिर की प्रसिद्धि का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उड़ीसा तक से लाेग यहां देवी के दर्शन करने आते हैं। मंदिर ट्रस्ट को लगता है कि जब देवी सच्चे मन से मांगी गर्इ इच्छा पूरी करती है, इसी तरह यहां की आमदनी का हिसाब सच्चा होना चाहिए।
Published on:
22 Sept 2017 05:00 pm

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