Bakrid 2021: कुर्बानी के लिए बकरों की होम डिलीवरी, पसंद नहीं आने पर पैसे वापस, इतनी है एक बकरे की कीमत

bakrid 2021, Eid ul azha 2021

कुर्बानी के लिए खरीदना है बकरा तो कराएं आनलाइन बुकिंग। घर पर पहुंचेगी बकरे की डिलीवरी। पसंद नहीं आने पर पूरे पैसे वापस की सुविधा। वाट्सएप और इंटरनेट पर बकरों की हो रही बिक्री ।

By: Rahul Chauhan

Published: 15 Jul 2021, 12:31 PM IST

मेरठ। Bakrid 2021. कोरोना संक्रमण काल में त्यौहारों को मनाने का कायदा और रिवाज दोनों बदल गए हैं। मेरठ की 40 साल पुरानी बकरा पैठ (meerut bakra paith) पर इसका असर पड़ा है। पिछले साल भी कोरोना संक्रमण काल में बकरा (bakrid 2021) पैठ नहीं लगी थी और ईंद पर कुर्बानी (kurbani) के लिए लोगों ने गुपचुप तरीके से बकरे कुर्बानी (Eid ul azha 2021) के लिए खरीदे थे। इस बार भी हालात पिछले साल जैसे ही हैं। इस बार भी मेरठ में बकरा पैठ नहीं लगी जिसके चलते लोगों को ईंद पर कुर्बानी के लिए बकरा खरीदने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन बकरा व्यापारियों और लोगों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है। इंटरनेट और वाटसएप के युग में अब बकरा भी आनलाइन बिक रहा है। बदलते जमाने की बयार में बकरे की खरीद-फरोख्त के तरीके भी बदल गए हैं। इस बार इंटरनेट और वाट्सएप ग्रुप पर बकरों की खरीद-फरोख्त हो रही है।

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बता दें कि मेरठ की बकरा मंडी नौचंदी ग्राउंड में लगती थी। इस मंडी में कई राज्यों के पशु व्यापारी आते थे और एक महीने पहले से बकरे के अलावा भैंस और ऊंटों की बिक्री शुरू कर देते थे। उत्तर भारत के बड़े बकरा पैठ में कोरोना संक्रमण और महंगाई की मार से बकरों की खरीदारी में कमी आई है। बकरों को बेचने का नया तरीका खरीदारों के लिए बहुत हद तक सहूलियत बन गया है। खरीदार मोबाइल पर बकरों की फोटो और वीडियो देख कुर्बानी के लिए बकरा पसंद कर रहे हैं। वाट्सएप ग्रुप पर बकरों की फोटो, वीडियो और उनकी कीमत डाली जा रही है। डील फाइनल होने पर बकरे की होम डिलेवरी की जा रही है। शकूरनगर निवासी मो. शमीम ने बताया कि आनलाइन बकरा खरीदने में सहूलियत तो है, लेकिन नुकसान भी हो सकता है। आनलाइन बेचे जा रहे बकरे के बारे में पूरी तरह से पता नहीं चलता। बकरे की खरीदारी से पहले अच्छे से जांच-परख लें।

मेरठ में मुंबई, कोलकाता, बिहार, असम, आसनसोल, राजस्थान, गुजरात, झारखंड से बकरों और भैंसों के र बड़े व्यापारी आते हैं। ये लोग यहां पर बकरों के अलावा दुंबा और अन्य पशुओं की बिक्री करते हैं। बता दे कि इस बार 21 जुलाई को बकरीद है। कुर्बानी का जानवर पहले से खरीद कर ईद-उल-अजहा तक उसे खिला-पिलाया जाता है। लेकिन इस बार बकरे की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। सबसे सस्ता बकरा की कीमत 10 से 11 हजार है, जबकि पिछले वर्ष सात से आठ हजार रुपये के बीच 12 से 14 किलो का बकरा लोगों ने खरीदा था। मोबाइल, कपड़े और अन्य उत्पादों की तरह कोरोना काल में बकरों का बाजार भी आनलाइन सज चुका है। वाट्सग्रुप और इंटरनेट मीडिया के दूसरे माध्यमों के जरिए लोग पसंद के बकरे खरीद रहे हैं। डिलीवरी के बाद बकरा पसंद न आने पर पूरा पैसा लौटाने की सुविधा भी दी जा रही है। पैसे के लेन-देन के लिए कैश और आनलाइन दोनों तरह की व्यवस्था है। ऑनलाइन बकरे की खरीदारी पर इस बार कई सुविधाएं दी जा रही हैं। बकरे पसंद न आने पर पूरा पैसा वापस करने का भी आफर दिया है।

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5 हजार से 1 लाख तक का बकरा

अल्लाह की राह में कुर्बानी देने के लिए लोगों ने बकरे खरीदना शुरू कर दिया है। इस बार पहले से तय बाजार से ज्यादा आनलाइन बकरों की बिक्री हो रही है। वाट्सएप ग्रुप पर बकरों की खूबियों (रंग, नस्ल, वजन, उम्र आदि) और फोटो के साथ मौजूद हैं। कीमत 5 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक है। लिसाडी गेट क्षेत्र के राशिद ने बताया कि दो दिन पहले वाट्सएप के जरिए 50 हजार रुपये में दो बकरा खरीदे हैं। बकरे की कीमत भी आनलाइन विक्रेता के खाते में ट्रांसफर करा दिया, लेकिन जब बकरा घर पहुंचा तो उसका वजन फोटो के हिसाब से कम दिखा। विक्रेता को बताया और दोनों बकरा वापस हो गया।

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