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निर्जल रखा राधाष्टमी का व्रत, फिर थिरके भजनों पर

मेरठ में सादगी के साथ मनाई गई राधाष्टमी पूजा पाठ कर राधा की मोहक प्रतिमा सजाई  

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मेरठ

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shivmani tyagi

Aug 28, 2020

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मेरठ। भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम की परम प्रतीक राधारानी का जन्मोत्सव मेरठ में कोरोना वायरस के चलते फैली महामारी के कारण सादगी से मनाया गया। मेरठ में भारत ज्ञान भूषण के निवास पर राधा जी की मोहक प्रतिमा सजाई गई और जन्मोत्सव का आयोजन किया गया।

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इस दौरान भारत ज्ञान भूषण ने बताया कि राधाष्टमी राधा रानी के अवतरण दिवस के रूप में मनाई जाती है, जिन्हें माता लक्ष्मी का रूप माना जाता है। राधा रानी को भगवान कृष्ण की दैवीय प्रेमिका के रूप में जाना जाता है। इनका अवतार कमल के फूल से हुआ तथा भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु के आठवें अवतार रूप में माना गया हैं। राधाष्टमी पर व्रत करने के बाद शाम को भक्ति के गीतों पर राधाभक्त थिरकते रहे। पूरा महौल भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम करीब 2 घंटे तक चला।

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भारत ज्ञान भूषण ने बताया कि राधाष्टमी मुख्य रूप से उन भक्तों द्वारा मनाया जाता है, जो भगवान कृष्ण की आराधना करते हैं। हिंदू पांचांग के अनुसार राधाष्टमी भद्रपद महीने में शुक्ल पक्ष के आठवें दिन मनाई जाती है।
परंपराओं के अनुसार, गौडिया वैष्णव संप्रदाय श्रीकृष्ण एवं राधा रानी के प्रति समर्पित होकर उनकी पूजा करते है। यह संप्रदाय चैतन्य महाप्रभु द्वारा वर्णित भगवत गीता और भागवत पुराण का पाठ करते हैं, चैतन्य महाप्रभु वैष्णव संप्रदाय के संस्थापक है।

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गौडिया वैष्णव संप्रदाय राधाष्टमी को अपनी प्रथाओं और परम्पराओं के अनुरूप आधे दिन उपवास का करते हैं। कुछ भक्त इस दिन सख्त उपवास का पालन भी करते हैं। वे पानी की बूंद का उपभोग किए बिना पूरे दिन कड़ा व्रत करते हैं। राधाष्टमी भगवान कृष्ण और राधा रानी के ईश्वरीय प्रेम के समरूप मनाया जाता है, भक्त श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त हेतु प्रशंसा, भजन और गीतों के साथ राधा रानी की पूजा करते हैं।

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