मेरठ से करीब 30 किलोमीटर सरधना में स्थित बेगम समरू के बनवाए 200 साल पुराने चर्च की पूरे विश्व में पहचान है। हिंदू मुस्लिम बस्ती के बीच बना ऐतिहासिक चर्च सौहार्द, आस्था और इतिहास का बेजोड़ नमूना माना जाता है।
सरधना चर्च को ईसाई धर्म के लोग कृपाओं की माता मरियम का तीर्थस्थान मानते हैं। मान्यता है माता मरियम श्रद्धालुओं की मुराद पूरी करती हैं। सरधना का चर्च अंतरराष्ट्रीय फलक पर भी चमक रहा है।
सरधना चर्च को मिला छोटी बसिलिका का दर्जा
बेगम समरू के बनवाए इस चर्च को पोप जॉन 23वें ने 1961 में छोटी बेसिलिका का दर्जा दिया था। बेसिलिका का मतलब होता अत्यन्त पवित्र स्थान। इसमें चर्च की भव्यता का काफी योगदान है। ऐतिहासिक और भव्य चर्चों को यह दर्जा दिया जाता है। सरधना चर्च में लगी कृपाओं की माता की चमत्कारी तस्वीर के कारण हर वर्ष विशेष प्रार्थना होती है।
4 लाख में रुपए में 11 साल में बना चर्च
सरधना का एतिहासिक चर्च 11 साल में बनकर तैयार हुआ। चर्च के बनने में करीब 4 लाख रुपए लागत आई थी। चर्च के दरवाजे खास किस्म के बनाए गए हैं।
कृपाओं की माता का महत्व
बेगम समरू की रियासत सरधना के चर्च में कृपाओं की माता मरियम की चमत्कारी मूर्ति फरियादियों की हर मुराद पूरी करती हैं। मान्यता है कि माता मरियम की इस चमत्कारी तस्वीर के सामने खड़े होकर यदि सच्चे मन से प्रार्थना की जाए तो मरियम फरियादी की सुनती हैं।
इटली में है मरियम का पवित्र तीर्थ
जब सरधना चर्च को तीर्थस्थान बनाने की मांग उठी। वर्ष-1955 में आगरा के सहायक आर्चबिशप जेबी इवान्जे लिस्टी इटली गए थे। उन्हें टस्कनी प्रांत के लैघोर्न शहर के लोगों से बातचीत की। लैघोर्न शहर के पास मौनटेनैरो की पहाड़ी पर 'कृपाओं की माता' का तीर्थ स्थान है। यहां के महाधर्माध्यक्ष ने उन्हें बताया कि उनकी माता की इस चमत्कारी तस्वीर की एक नकल सरधना के चर्च के लिए चाहते हैं।
1972 में चोरी हुआ था सोने का ताज
इसके बाद कलाकारों से तस्वीर बनवाई। तस्वीर में माता और बालक के सिर पर जड़े सोने के दोनों ताज लैघोर्न के लोगों का तोहफा था। जो कि 1972 में चोरी हो गया। महाधर्माध्यक्ष जब 25 सितम्बर 1955 में संत पोप पियुस 12वें से मिलने गए तो इस तस्वीर को अपने साथ ले गए।
उन्होंने उनके सामने उत्तर भारत में एक तीर्थ स्थान शुरू करने की इच्छा जताई। वे बिना हिचकिचाए राजी हो गए और तस्वीर का सजदा कर उसे अपनी इजाजत प्रदान की और कहा कि वे दुआ करेंगे कि माता मरियम भारत के लोगों पर मेहरबान रहें।
कौन थीं सरधना का चर्च बनवाने वाली बेगम समरू
जिला बागपत के कोताना कस्बा के निवासी लतीफ अली खां की बेटी फरजाना थी। भरतपुर के राजा जवाहर सिंह के सेनापति वाल्टर रेंनार्ड उर्फ समरू ने मुस्लिम रस्मों के मुताबिक फरजाना से निकाह किया। समरू की मौत के बाद फरजाना बेगम ने कैथोलिक धर्म अपना लिया था। उन्होंने अपना नाम योहन्ना रख लिया। उसके बाद ही इस सरधना चर्च का निर्माण करवाया गया।