16 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कांपते हाथों से 4.5 साल के बेटे ने फौजी पिता को दी मुखाग्नि, हर आंख हो गई नम

Indian Army soldier Rahul Bhadana death news : मेरठ के एक जवान की हिमाचल यात्रा के दौरान मौत हो गई। छुट्टी के दौरान राहुल भड़ाना हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर गए थे, जहां डमटाल में एक सड़क हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली।

2 min read
Google source verification

अपने परिवार के साथ फौजी राहुल भड़ाना, जिनकी हिमाचल प्रदेश हादसे में मौत हो गई, PC- Patrika

मेरठ की हवा सोमवार को असाधारण रूप से भारी थी। तिरंगे में लिपटा एक बेटा अपने आंगन लौटा था। लेकिन, कदमों से नहीं, कंधों पर। जम्मू-कश्मीर में तैनात भारतीय सेना के हवलदार राहुल भड़ाना का पार्थिव शरीर जैसे ही भड़ौली गांव पहुंचा, हर आंख नम हो गई, हर दिल गर्व और पीड़ा से भर उठा।

सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया, जब साढ़े चार साल का मासूम दिव्यांश अपने पिता की अर्थी के पास खड़ा था। उसे शायद पूरी तरह समझ नहीं था कि क्या हो रहा है, लेकिन माहौल का दर्द उसकी मासूम आंखों में साफ झलक रहा था। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार उसने अपने पिता को गंगाजल अर्पित किया और फिर कांपते हाथों से मुखाग्नि दी। उस क्षण वहां मौजूद हजारों लोगों की सिसकियां एक साथ गूंज उठीं।

भाइयों ने रोते हुए अर्थी को दिया कंधा

मां बदहवास होकर बेटे के पार्थिव शरीर से लिपटी थीं। पत्नी सोनल की चीखें सुनकर पत्थर दिल भी पिघल जाए। पिता अपने जवान बेटे को अंतिम बार देख रहे थे। आंखों में अथाह शून्य और सीने में असीम पीड़ा समेटे। भाइयों ने रोते-रोते अर्थी को कंधा दिया, तो बहनों का विलाप हर किसी को भीतर तक झकझोर रहा था।

नारों से गूंजा पूरा इलाका

गांव ही नहीं, आसपास के कई इलाकों से लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। अंतिम यात्रा जब निकली तो रास्ते भर घरों की छतों से फूल बरसाए गए। ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, राहुल फौजी का नाम रहेगा’ के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। हर कोई अपने वीर सपूत को अंतिम सलाम देने आया था।

33 वर्षीय राहुल भड़ाना वर्ष 2016 में सेना में भर्ती हुए थे। बीते दस वर्षों में उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में सेवा दी और हाल ही में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के अखनूर क्षेत्र में थी। छुट्टी के दौरान वे हिमाचल प्रदेश यात्रा पर गए थे, जहां डमटाल में एक सड़क हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली। सेना की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

5.5 साल पहले हुई थी शादी

करीब साढ़े पांच साल पहले अमरोहा की सोनल से उनका विवाह हुआ था। चार बहनों और तीन भाइयों वाले परिवार में राहुल दूसरे नंबर पर थे। पीछे रह गईं ढेरों यादें, अधूरे सपने और एक नन्हा बेटा- जो शायद आने वाले वर्षों में समझ पाएगा कि उसके पिता सिर्फ उसके ही नहीं, पूरे देश के नायक थे।