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जब घर के सभी मर्द मार दिये गए तो महिलाओं ने उठाया ये कदम जिसकी हो रही तारीफ

विंध्याचल का तिहरा हत्या काण्ड, जिसमें मार दिये गए घर के सारे मर्द। कोर्ट ने सुना दिया फैसला, तीन को हुई फांसी की सजा।

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Mohd Rafatuddin Faridi

Nov 10, 2016

Vindhyachal triple murder

Vindhyachal triple murder

मिर्जापुर. महिलाएं क्या नहीं कर सकती हैं। अपनी जिद पर आ जाएं तो पुरुष की सत्ता को झुकाकर रख दें। ऐसे किस्सों से इतिहास भरे पड़े हुए हैं। ऐसा ही कुछ मिर्जापुर के विंध्याचल में भी हुआ, तिहरे हत्याकाण्ड में परिवार के तीन लोग मार दिये गए और इसके बाद सदमे में घर के बचे एकमात्र मर्द ने भी दम तोड़ दिया। पर सलाम है उन महिलाओं को जिन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वह लड़ती रहीं, सभी परेशानियों और अड़चनों को झेलते हुए। आखिरकार उनकी जद्दोजेहद काम आई और वह हत्यारों को उनके अंजाम तक पहुंचाने में कामयाब रहीं।



कोर्ट ने तीन अभियुक्तों को सुनाई फांसी की सजा
विंध्याचल में हुए तिहरे सनसनीखेज तिहरे हत्या कांड के आरोपी तीन मुजरिमों को कोर्ट ने फांसी की सजा सुना दी। कोर्ट ने उनके किये गए जुर्म को जघन्य अपराध की श्रेणि में रखा। जब यह फैसला सुनाया गया उस समय तीनों आरोप भी कोर्ट में मौजूद थे। कोर्ट ने मामले को रेयर एन रेयरेस्ट की श्रेणि में पाया और मौत की सजा सुनाई। इसके अलावा 25-25 हजार रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया। अर्थदण्ड न देने की सूरत में दो साल की सजा और काटनी होगी।



ये थी पूरी घटना
विंध्याचल थाना क्षेत्र के अमरावती गांव में 24 अप्रैल 2011 को एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या सोते समय कर दी गयी थी। मृतक बृजलाल मौर्या, चुलबुल और नागेंद्र की हत्या उन्हीं के घर में रात 12 बजे सोते समय कर दी गयी, जिसके पीछे की वजह पुरानी रंजिश बतायी गयी। आरोप था कि गांव के ही संगम पासी, पुद्दी पासी और संजय दुबे ने घर में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी थी। परिजनों का दावा है कि हत्या में कुल पांच लोग शामिल थे। पर उनमें से दो को कोर्ट पहले ही बरी कर चुका है। विंध्याचल थाने में मृतक वृजलाल मौर्या की पत्नी शीला की तहरीर पर मामला दर्ज किया गया था। इसमें दावा किया गया कि जब परिवार सोने की तैयारी में था तो आरोपी संगम पासी, पुद्दी पासी और संजय दुबे घर में घुसे और तीनों को गोली मारकर हत्या कर दिया। हत्या में कुल पांच लोग शामिल थे इसमें से दो अन्य अभियुक्त बाद मे हलीम और फुन्नी यादव को साक्ष्य के आभाव में बरी कर दिया गया।



घर में नहीं बचा काई मर्द
वहीं पूरे मामले पर आज कोर्ट के फैसले के बाद घर की महिलाओं ने खुशी जतायी और कहा कि थोड़ी देर भले हुई पर उन्हें न्याय मिला। खास बात तो यह है की इस हत्या के बाद घर में कोई पुरुष बचा ही नहीं। घर में सिर्फ छोटे-छोटे बच्चे और तीन महिलाएं शीला उसकी विधवा देवरानी निशा और 70 वर्षीय बृद्ध सास ही बचीं। तिहरे हत्या कांड के चार दिन बाद ही हादसे से सदमे में शीला के देवर और निशा के पति की भी मौत हो गयी थी। शीला ने अपने देवरानी निशा के साथ मिल कर हत्यारों को सजा अपने दम पर दिलाई है। एक साथ चार पुरुष सदस्यों की मौत के बाद भी दोनों महिलाओ ने संघर्ष किया न्याय हासिल किया।

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