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ग्राउंड रिपोर्ट: त्रिकोणीय मुकाबले में फंस सकती है अनुप्रिया पटेल की सीट, इन जातियों पर है जीत का दारोमदार

रोजगार के लिये पलायन बनी मजबूरी, कभी बाहरी लोगों को देता था रोजगार 2019 में इस लोकसभा सीट पर रोचक हुआ मुकाबला गुम होती मखमली कालीनें और बर्बाद पीतल उद्योग की कहानी कहती है मिर्जापुर लोकसभा

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Mirzapur constituency

मिर्जापुर लोकसभा सीट

सुरेश सिंह

मिर्जापुर. यूपी का मिर्जापुर जिला कभी अपनी नरम मुलायम कालीन और पीतल बर्तन उद्योग के लिये जाना जाता था। वो दिन भी थे, जब दूसरे शहरों से लोग रोजगार के लिये मिर्जापुर आते थे । जिले की यह संपन्नता बीते जमाने की बात हो गई, आज बेरोजगारी यहां की सबसे बड़ी समस्या है । कालीन उद्योग और पीतल बर्तन उद्योग दोनों की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि जिले से लोग रोजगार के लिये पलायन कर रहे हैं । आजादी के बाद से कई जनप्रतिनिधि आये और विकास के लंबे चौड़े वादे किये, मगर हालात नहीं बदले ।


पर्यटन की दृष्टि से मिर्जापुर काफी महत्वपूर्ण जिला है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक वातावरण की वजह से हर साल लाखों श्रद्धालु मिर्जापुर पहुंचते हैं। । मिर्जापुर स्थित विन्ध्याचल धाम के अलावा यहां के सीता कुण्ड, लाल भैरव मंदिर, चुनार किला, टंडा जलप्रपात, विन्धाम झरना देखने रोजाना लोग पहुचते हैं । यूपी में योगी सरकार आने के बाद इस क्षेत्र में कई काम किये गये हैं।

क्या है मिर्जापुर सीट का जातीय समीकरण

मिर्ज़ापुर सीट पर अगर जातीय समीकरण की बात करे तो यहां पर सबसे अधिक कुर्मी मतदाता हैं, जो कुल मतदाता के 3 लाख 5 हजार के लगभग हैं। सामान्य मतदाताओ की संख्या 23.48 प्रतिशत है। ओबीसी मतदाताओ का प्रतिशत सबसे अधिक 49.29 प्रतिशत है ।













































जातिमतदाता की संख्या
कुर्मी3 लाख 5 हजार
बिंद1 लाख 45 हजार
ब्राह्मण1 लाख 55 हजार
मौर्या1 लाख 20 हजार
क्षत्रिय80 हजार
वैश्य1 लाख 40 हजार
हरिजन2 लाख 55 हजार
कोल1 लाख 15 हजार
यादव85 हजार

इसके अलावा पाल 50 हजार, सोनकर- 30 हजार और प्रजापति, नाई ,विश्वकर्मा, मुस्लिम मिलाकर करीब दो लाख की आबादी है।

मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र
नगर (सदर), छानबे(सुरक्षित), मझवां, मड़िहान, चुनार

इस बार रोचक मुकाबला होने की उम्मीद

2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से अपना दल(एस) की नेता अनुप्रिया पटेल ने चुनाव जीता था। अनुप्रिया पटेल ने बसपा प्रत्याशी समुद्र बिंद को हराया था। अनुप्रिया पटेल को 436536, जबकि समुद्र बिंद को 217457 वोट मिले थे। कांग्रेस प्रत्याशी ललितेश पति त्रिपाठी को 152666 और सपा प्रत्याशी सुरेंद्र पटेल को 108859 वोट मिले थे। अनुप्रिया पटेल मोदी मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य परिवार कल्याण राज्य मंत्री है। एक बार फिर वह भाजपा और अपना दल(एस) एनडीए गठबंधन की तरफ से एक बार फिर मिर्ज़ापुर से प्रत्याशी हैं। उनका मुकाबला सपा -बसपा महागठबंधन के प्रत्यासी राजेंद्र एस बिंद और काग्रेस प्रत्यासी ललितेश पति त्रिपाठी के साथ होगा। इस सीट पर इस बार रोचक मुकाबला होने की उम्मीद है ।

मिर्ज़ापुर लोकसभा क्षेत्र मे 2019 के संसदीय चुनाव में कुल 18 लाख 23 हजार 859 मतदाता चुनाव में वोट डालेंगे। जिनमें पुरूष मतदाताओ की संख्या 9 लाख 61 हजार 640 और महिला मतदाता 8 लाख 62 हजार 059 है। पिछले 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद कुल 34 हजार 822 नए मतदाता जुड़े है। नए मतदाताओं में महिला और पुरुष मतदाताओं में पुरुष मतदाता 18 हजार 835 और महिला मतदाता 16 हजार 284 हैं।

क्या है पीतल उद्योग और कालीन उद्योग की हालत
मिर्ज़ापुर में पांच सौ वर्ष पुराना पीतल उद्योग कारोबार इन दिनों बहुत ही मुश्किल दौर से गुजर रहा है। शहर के प्रसिद्ध बर्तन मण्डी कसरहट्टी की सड़कों पर आज वह भीड़ भाड़ नही दिखती, जहां से कभी पीतल के बर्तन देश और प्रदेश के विभिन्न इलाको में भेजे जाते थे। यहां के सैकडों वर्ष पुराने धंधे पर संकट गहराता जा रहा है। व्यापारी बताते हैं कि कभी इसी शहर में पांच हजार स्थानों पर बर्तन बनाने का काम किया जाता था। हर घरों में बर्तन बनाने के लिए भठ्ठिया थी। मगर आज वह सिकुड़ कर पांच सौ लोगों के हाथों में ही रह गई हैं। बेरोजगारी की मार से बेहाल परिवार पलायन करने को मजबूर है। व्यवसाय से जुड़े मजदूर भुखमरी की स्थिति में पहुंच गए हैं। भदोही-मिर्जापुर कालीन परिक्षेत्र जहां से कालीन उद्योग का उदय हुआ, वहां का निर्यात गिरता जा रहा है। कालीन निर्यात में भदोही-मिर्जापुर परिक्षेत्र का कालीन गिर कर 50 से 60 प्रतिशत तक रह गया है।

क्या कहती है जनता:
लोकसभा चुनाव 2014 में पहली बार सांसद बनी अनुप्रिया पटेल के पांच सालों के कार्यकाल की बात करें तो पिछले अन्य सांसद के मुकाबले उनका कार्यकाल ठीक है। जिले में इन पांच सालो में विकास के कई काम हुए जिनमें मेडिकल कॉलेज, केंद्रीय विद्यालय, सड़कों के चौड़ीकरण, पेट्रोल डिपो का शिलान्यास, मिर्ज़ापुर और विंध्याचल रेलवे स्टेशन का सौंदर्यीकरण शामिल है। छानवे इलाके के पुष्पराज सिंह का कहना है कि अनुप्रिया ने पांच सालों में ठीक काम किया। वही गोगांव के रहने वाले वीरेंद्र कुमार का कहना है कि विकास के साथ साथ पांच सालों में संसदीय क्षेत्र में उनकी उपलब्धता लगातार रही जो बड़ी बात है। हालांकि शहर के भरुहना के रहने वाले आयुष का कहना है कि वह पांच सालों में जिस तरह से केंद्र में मंत्री रही वह इससे और अच्छा काम कर सकती थी। सिटी ब्लॉक के रामनारायण और श्याम बहादुर का कहना है कि पांच सालों में काम ठीक हुआ है। वहीं समाजसेवी निर्मला राय का कहना है कि यहां सांसद ने विकास कार्य करवाया है। गोविंद निषाद का कहना है कि अगर जाति पाति से उठ कर देखे तो सांसद ने पांच सालों में कई विकास करवाया है। वही राजू खां का कहना है कि कोई विकास कार्य नही हुआ है, वह केंद्रीय मंत्री थी, उन्हें जनपद में रोजगार के लिए बड़े काम करना चाहिए था। फैक्ट्री लगवानी चाहिए मगर वह नहीं कर पायी।

कब किसी पार्टी ने हासिल की जीत























































1952जेएन विल्सनकांग्रेस
1957जेएन विल्सनकांग्रेस
1962पं.श्यामधर मिश्रकांग्रेस
1967वंश नारायण सिंहजनसंघ
1971अजीज इमामकांग्रेस
1977फकीर अली अंसारीजनता पार्टी
1980अजीज इमामकांग्रेस
1984उमाकांत मिश्राकांग्रेस
1989युसूफ बेगजनता दल
1991वीरेंद्र सिंह मस्तभाजपा












































1996फूलन देवीसपा
1998वीरेंद्र सिंह मस्तभाजपा
1999फूलन देवीसपा
2002 (उपचुनाव)रामरति बिंदसपा
2004नरेंद्र कुशवाहाबसपा
2007 (उपचुनाव)रमेश दुबेबसपा
2009बाल कुमार पटेलसपा
2014अनुप्रिया पटेलअपना दल

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पिछले तीन चुनाव का परिणाम देखें तो मिर्जापुर संसदीय सीट से अभी तक कोई लगातार दूसरी बार जीत हासिल नहीं कर पाया है। फूलन देवी की हत्या के बाद 2002-04 के उप चुनाव में सपा के रामरती बिंद ने यहां से चुनाव जीता। इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर नरेंद्र कुशवाहा ने चुनाव जीता था। हालांकि एक निजी चैनल के स्टिंग में फसने के बाद उनकी संसद सदस्यता रद्द होने के बाद हुए उप चुनाव में बसपा के टिकट पर रमेश दुबे ने चुनाव जीता। इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा के टिकट पर बालकुमार पटेल ने चुनाव जीता। लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा -अपना दल के गठबंधन से अनुप्रिया पटेल ने चुनाव जीता । इस बार त्रिकोणीय मुकाबले में अनुप्रिया पटेल की राह आसान नहीं है ।

क्या है मिर्जापुर का इतिहास:
मिर्जापुर जिले का गठन ईस्ट इंडिया कम्पनी के अफसर लार्ड मार्कक्वेस वेलेस्ले ने किया था। जब उन्हें ईस्ट इंडिया कम्पनी का अफसर बनाया गया तो बंगाल से मिर्जापुर तक व्यापारिक गतिविधियों के लिए जल मार्ग की स्थापना की। बंगाल घाट से मिर्जापुर तक पानी की जहाजों से विभिन्न सामानों का आयात व निर्यात होता था। लार्ड वेलेस्ले के नाम पर एक नगर भी है। उसका नाम वर्तमान में वासलीगंज हो गया है। ब्रिटिश हुकूमत ने बरीर घाट(बरियाघाट) का निर्माण कराया। मुकेरी बाजार और तुलसी चौक तत्कालीन समय के सबसे समृद्ध बाजार थे।

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