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89 साल से कीचड़ खाकर जिंदा रह रहा 100 साल का वृद्ध, ऐसे लगी थी लत

गुरबत इंसान के सामने कैसेे-कैसे हालात पैदा कर देती है, इसका जीता जागता उदाहरण एक 100 साल का वृद्ध है।

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Mohit sharma

Jan 19, 2018

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साहेबगंज। गुरबत इंसान के सामने कैसेे-कैसे हालात पैदा कर देती है, इसका जीता जागता उदाहरण एक 100 साल का वृद्ध है। दरअसल, मामला झारखंड के साहेबगंज से जुड़ा है। यहां एक सौ वर्षीय बुजुर्ग को कीचड़ खाने की ऐसी लत लग गई कि वह उसके बिना रह नहीं पाता। यह लत उन्हे किसी शौक में नहीं बल्कि भूख मिटाने के चलते लगी है। बता दें कि साहेबगंज में पिछले दिनों भूख से मरने वालों की संख्यामें काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है।

कीचड़ को बनाया आहार

कीचड़ खाकर भूख शांत करने का मामला आपको चौंका सकता है, लेकिन यह बल्कि सच्ची घटना है। यह कहानी सौ वर्षीय कारू नाम के शख्स की है। कारू पिछले 89 सालों से कीचड़ पर निर्भर हैं। यहां तक कि अब कीचड़ खाना उनकी आदत में शुमार हो गया है। कारू को कीचड़ की ऐसी लत लग चुकी है, कि वह बिना इसके जिंदा नहीं रह सकते। बताया जा रहा है कि लत में तब्दील हुई की मजबूरी के पीछे एक दर्द भरी कहानी है। दरअसल, कारू जब 11 साल के थे, तब उनके घर के हालात ठीक नहीं थे, यहां तक कि घर में खाने के भी लाले थे। ऐसे में पेट की भूख शांत करने के लिए जब खाना मयस्सर नहीं हुआ तो उन्होंने कीचड़ को अपना आहार बनाना शुरू कर दिया और तब से अब तक वह कीचड़ खाकर ही अपना पेट भर रहे हैं। इतने सालों से कीचड़ खाते-खाते अब उनको इसकी ऐसी लत लग गई, कि वह बिना उसके जिंदा नहीं रह सकते। यही नहीं कारू अपने साथ हमेशा कीचड़ का बर्तन साथ रखते हैं।

तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया

बता दें कि इससे पहले झारखंड में भूख के चलते हुई मौतों को लेकर सियासी बहस न जोर पकड़ लिया था। एक आंकड़ें के अनुसार यहां अक्टूबर 2017 में 11 वर्षीय एक बच्ची ने भूख के कारण तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया था। जबकि इसके पीछे वजह उसको राशन न मिलना बताई गई थी। बच्ची के मां का आरोप था कि आधार कार्ड न होने के कारण उसको राशन नहीं दिया गया था। इसके बाद राज्य में एक के बाद एक भूख से मौतों के मामले सामने आए थे।

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