
Protest of Parsa coal block (Photo- Patrika)
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के बैनर तले शुक्रवार को शहर के बीटीआई मैदान में आमसभा का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले सरगुजा संभाग में ग्राम सभाओं के विरोध को दरकिनार कर जल-जंगल-जमीन और पर्यावरण का विनाश (Hasdev coal block protest) करते हुए जबरन खनन परियोजनाएं खोली जा रही हैं। सभा के बाद रैली निकालकर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया।
वक्ताओं ने कहा कि सरगुजा संभाग संविधान की पांचवीं अनुसूची में शामिल है, जहां पंचायत उपबंधों के तहत समुदाय के संसाधनों, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए ग्रामसभा को सर्वोच्च अधिकार दिए गए हैं। कानून के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण (Hasdev coal block protest) से पहले ग्रामसभा से अनिवार्य परामर्श और सहमति जरूरी है।
इसके बावजूद परसा और केते एक्सटेंशन, एसईसीएल की मदनपुर, अमेरा विस्तार सहित रायगढ़ और कोरबा जिलों की कई खनन परियोजनाओं (Hasdev coal block protest) के लिए कोल बेयरिंग एक्ट 1957 के तहत ग्रामसभा की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है।
इसे आदिवासी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन बताया गया। इस दौरान भानू प्रताप सिंह, त्रिभुवन सिंह, अनंत सिन्हा, प्रितपाल सिंह, अमृत, प्रशांत सिंह, संतोष समेत अन्य उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि हसदेव के परसा कोल ब्लॉक (Hasdev coal block protest) में फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव बनाकर वन स्वीकृति ली गई। छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग की जांच रिपोर्ट में भी ग्रामसभा प्रस्ताव फर्जी और कूटरचित पाए गए हैं। इसके बावजूद पुलिस बल की मौजूदगी में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जा रही है।
हसदेव अरण्य (Hasdev coal block protest) जैसे जैव विविधता से भरपूर और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में खनन से मिनी माता हसदेव बांगो बांध के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। मानव-हाथी संघर्ष बढ़ रहा है और कई लोगों की हाथियों से कुचलकर मौत हो चुकी है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन क्षेत्र मैनपाट में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन (Hasdev coal block protest) से न केवल मैनपाट का अस्तित्व संकट में पड़ेगा, बल्कि अंबिकापुर शहर में गंभीर जल संकट भी उत्पन्न होगा। खनन के कारण जंगलों का तेजी से विनाश हो रहा है, नदियां सूख रही हैं और जैव विविधता समाप्ति की ओर है।
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला ने मांग की कि हसदेव अरण्य (Hasdev coal block protest) में नई केते एक्सटेंशन और परसा कोयला खदान में पेड़ कटाई तत्काल रोकी जाए। ग्रामसभा की सहमति के बिना मदनपुर और अमेरा विस्तार परियोजनाओं का भूमि अधिग्रहण निरस्त हो।
मैनपाट में प्रस्तावित बॉक्साइट खनन रद्द कर ईको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाए। फर्जी आपराधिक प्रकरण वापस लिए जाएं। पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्रामसभा की पूर्व सहमति का सख्ती से पालन हो। स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार दिया जाए और पर्यावरण संरक्षण नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए।
Updated on:
16 Jan 2026 08:53 pm
Published on:
16 Jan 2026 08:33 pm
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