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Unique Holi: Video: होलिका दहन कर अंगारों पर चलते हैं लोग, फिर भी पांव में नहीं पड़ते फोड़े, मानते हैं दैवीय कृपा

Unique Holi: अंबिकापुर शहर से लगे ग्राम करजी में दशकों से होलिका दहन की रात निभाई जा रही है ये अनोखी परंपरा, अंगारों पर चलकर परिवार के सुख-समृद्धि की करते हैं कामना

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Unique Holi

People walking on burning coals (Photo- Video grab)

अंबिकापुर. होली पर्व पर ग्रामीण अचंलों में लोग अलग-अलग तरह की परंपराओं का निर्वहन लंबे समय से करते आ रहे हैं। कहीं किसी अनहोनी के डर से सप्ताहभर पूर्व होली मना ली जाती है तो कहीं एक दिन बाद होली मनाई जाती है। होली पर ऐसी ही एक परंपरा का निर्वहन अंबिकापुर से लगे ग्राम करजी के दशकों से करते आ रहे हैं। यहां होलिका दहन करने के तत्काल बाद जलते अंगारों (Unique Holi) पर चलने की परंपरा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अंगारों पर चलने के बाद भी ग्रामीणों के पैर में फफोले तक नहीं पड़ते हैं। इसे गांव के लोग दैवीय कृपा मानते हैं।

होलिका दहन के दौरान सरगुजा जिले के दरिमा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम करजी से हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। करजी गांव में ग्रामीण दहकते अंगारों (Unique Holi) पर नंगे पांव चलते नजर आए। बताया जा रहा है कि यह परंपरा गांव में दशकों से निभाई जा रही है।

हर वर्ष होलिका दहन के बाद जब अग्नि शांत होकर अंगारों में बदल जाती है, तब गांव के लोग उसमें चलकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यह देवी (Unique Holi) की कृपा है। अंगारों पर चलने के बाद भी उनके पैरों में न तो फफोले पड़ते हैं और न ही किसी प्रकार का दर्द होता है। लोग इसे भगवान का आशीर्वाद मानते हैं।

Unique Holi: पहुंचते हैं आस पास के गांव के लोग

इस अनोखी परंपरा (Unique Holi) को देखने के लिए आसपास के कई गांवों से भी लोग मौके पर पहुंचते हैं। होलिका दहन के साथ आस्था और विश्वास का यह दृश्य देर रात तक चर्चा का विषय बना रहा। लगभग 5 से 6 फीट लंबे बिछाए गए आग के अंगारों पर लोग नंगे पांव चलते नजर आए।

अमरपुर व बसवाही की होली भी प्रसिद्ध

सरगुजा संभाग के कोरिया जिला अंतर्गत ग्राम अमरपुर व सोनहत क्षेत्र के ग्राम बसवाही की होली भी अनोखी परंपरा के लिए जाने जाते हैं। अमरपुर में होली से 7 दिन पहले जबकि ग्राम बसवाही में 8 दिन पहले होली (Unique Holi) मनाई जाती है।

इन गांव के लोगों का मानना है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो गांव में कोई न कोई अनहोनी होना तय है। यहीं वजह है कि वर्षों से दोनों गांवों के लोग इस अनोखी परंपरा का पालन करते आ रहे हैं।

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