
भारत में गाय को माता माना जाता है। सांस्कृतिक द्रष्टि से देखें तो लोग आदिकाल से गाय का पालन-पोषण करते आये हैं। देखा जाए तो यूं तो पूरी विश्व में ही गाय अपना अलग महत्व रखती है, लेकिन भारत के संदर्भ में बात की जाए तो प्राचीन काल से यह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। चाहे वह दूध का मामला हो या फिर खेती के काम में आने वाले बैलों का। दुधारू पशु होने के कारण यह बहुत उपयोगी घरेलू पशु है। गाय पालन ,दूध उत्पादन व्यवसाय या डेयरी फार्मिंग छोटे व बड़े स्तर दोनों पर सबसे ज्यादा विस्तार में फैला हुआ व्यवसाय है।
शहरीकरण की तरफ बढ़ रहे भारत में आज भी ग्रामीण इलाकों में लोग गाय और बहुत से दूधारू पशु को पालना पसंद करते हैं। कई गांवो में आजीवका की भी यही साधन है। जब कभी भी लोग गाय पालन का व्यवसाय करने को सोचते हैं तो सबसे पहले वो ये जानना बहुत जरुरी समझते हैं कि कौन सी नस्ल की गाय सबसे ज्यादा दूध देती है!
आज हम बात कर रहे हैं समृद्ध भारत की एक अनोखी गाय की प्रजाति के बारे में जिसे ‘गीर’ कहा जाता है। गीर गाय प्रतिदिन 50-80 लीटर दूध देती हैं। खासतौर पर गुजरात में पायी जाने वाली इस प्रजाति के गोवंश का मूल स्थान कठियावाड़ के दक्षिण में पहाडि़यों के क्षेत्र में गीर जंगल है। इस नस्ल की गायों में दूध देने की अद्भुत क्षमता है।
बता दें कि गीर गाय की मांग सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी है। सबसे ज्यादा ब्राजील और इस्राइल के लोग इस गाय को पालना पसंद करते हैं, क्योंकि यह सबसे बड़ी गाय है और यह वहां के वातावरण में अच्छी तरह पलती-बढ़ती भी है।
ये हैं सबसे ज्यादा दूध देने वाली गाय की नस्ल:
1) गीर गाय (सालाना-2000-6000 लीटर दूध, स्थान – सौराष्ट्र , गुजरात)
2) साहिवाल गाय (सालाना-2000-4000 लीटर दूध, स्थान -उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब)
3) लाल सिंधी (सालाना-2000-4000 लीटर दूध, स्थान -उत्पत्ति सिंध में लेकिन अभी पूरे भारत में)
4) राठी (सालाना-1800-3500 लीटर दूध, स्थान-राजस्थान, हरियाणा, पंजाब)
5) थरपार्कर (सालाना-1800-3500 लीटर दूध, स्थान-सिंध, कच्छ, जैसलमेर , जोधपुर)
6) कांक्रेज (सालाना-1500-4000 लीटर दूध, स्थान-उत्तरी गुजरात व राजस्थान)
Published on:
25 Nov 2017 11:05 am
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