सेना में नया फार्मूला: पूरी पेंशन उन्हीं को जिन्होंने 35 साल तक अपनी सेवाएं पूरी की

Highlights.

  • डीएमए ने तैयार किया प्रस्ताव, पेंशन घटाने के लिए सेना ने की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने की तैयारी
  • 21-25 साल तक नौकरी करें तो 50%, 26-30 साल तक 60% और 31-35 साल तक 75% पेंशन
  • कर्नल रैंक के अधिकारी 57 साल, ब्रिगेडियर 58 साल और मेजर जनरल 59 साल तक सेवा दे सकेंगे

नई दिल्ली.

सेना का पेंशन-बजट कम करने और निजी क्षेत्र में कैरियर बनाने के लिए अपनी सेवाएं बेहद कम समय में ही स्थगित कर देने वाले सैनिकों से परेशान होकर सेना ने अब नया पेंशन फार्मूला तैयार किया है। डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री एफेयर्स (डीएमए) ने प्रस्ताव दिया है कि उन सैनिकों और सैन्य अधिकारियों को ही पूरी पेंशन दी जाए जो 35 साल तक सेना में अपनी सेवाएं पूरी करें।


जो 21-25 साल तक की नौकरी करें उन्हें 50 प्रतिशत, 26-30 साल तक सेवा देने पर 60 प्रतिशत और 31-35 साल तक सेवा देने वाले को 75 फीसदी ही पेंशन दिया जाए। इससे कर्नल और उससे ऊपर रैंक के अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ गई है।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत के अंतर्गत काम कर रहे डीएमए के इस प्रस्ताव के मुताबिक कर्नल रैंक के अधिकारी अब 57 साल, ब्रिगेडियर 58 साल और मेजर जनरल 59 साल तक सेवाएं दे सकेंगे। अभी क्रमश 54, 56 और 58 साल है। ईएमई, सर्विस कोर, ऑर्डनेंस कोर, लॉजिस्टिक, टेक्नीकल और मैकेनिकल ब्रांच के सैनिकों के लिए भी रिटायरमेंट की उम्र 57 साल कर दी गई है। यह नियम तीनों सेनाओं के लिए लागू होगा। 10 नवंबर तक इसका ड्राफ्ट जीएसएल पेश करने के लिए कहा गया है।

बजट का 28% खर्च पेंशन पर

सेना में 20 साल सेवाएं देने वाले सैनिकों को पूरी पेंशन मिलती है। देश में 25 लाख पूर्व सैनिक, छह लाख सिविल सैन्य कर्मचारी हैं। साल के रक्षा बजट 4.70 लाख करोड़ रुपए का करीब 28 प्रतिशत 1.33 लाख करोड़ रुपए पेंशन में खर्च होता है। इस नियम के लागू होने पर यह भारत काफी कम होगा।

मित्र देशों के लिए 20 सीटें बढ़ाईं

मित्र-देशों के सैन्य अफसरों की सामरिक प्रशिक्षण के लिए दिल्ली स्थित नेशनल डिफेंस कॉलेज (एनडीसी) में दो सालों में 20 अतिरिक्त सीट और बढ़ाई जाएंगी। अभी 45 सीटें हैं। इसका लाभ नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार को होगा। पहली बार उजबेकिस्तान, ताजिकिस्तान, फिलीपींस, इंडोनेशिया और मालद्वीप के अफसरों को भी ट्रेनिंग मिल सकेगी।

Ashutosh Pathak
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