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एस्ट्रोसैट ने ली 10.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर आकाशगंगा की तस्वीर, तेजी से बन रहे नए तारे

इसरो द्वारा स्थापित खगोल वेधशाला एस्ट्रोसैट ने आकाशगंगा एनजीसी-2336 की तस्वीर उतारी है, यहां बहुत तेजी से नए तारों का निर्माण हो रहा है।
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नई दिल्ली

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shachindra shrivastava

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Updated: 28 Oct 2017, 8:21 PM IST

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Astrosat

बेंगलूरु.भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा अंतरिक्ष में स्थापित खगोल वेधशाला एस्ट्रोसैट ने धरती से 10.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर एक विशेष आकाशगंगा एनजीसी-2336 की अद्भूत तस्वीर उतारी है, जहां बहुत तेजी से नए तारों का निर्माण हो रहा है। इस तस्वीर को उतारने के लिए एस्ट्रोसैट के पे-लोड अल्ट्रावायोलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (यूवीआईटी) का उपयोग किया गया।

इसरो ने कहा है कि जिस आकाशगंगा एनजीसी-2336 की तस्वीर एस्ट्रोसैट ने उतारी है वह उत्तर आकाश में कैमलोपर्डेलिस नामक तारासमूह में है। यह दंड सर्पिल आकाशगंगा है और इसकी सर्पिल भुजाओं में गैस के विशाल बादल विभिन्न स्थानों पर फैले हुए हैं। इन गैसों के बादल में नए तारों का निर्माण तेजी से हो रहा है। इन बादलों से आते हुए अल्ट्रा वायलट विकिरण को एस्ट्रोसैट के यूवी दूरबीन ने चित्रित किया है। यह आकाशगंगा धरती से 10.5 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर है और इसकी खोज 18 77 में जर्मन खगोल वैज्ञानिक ई.टेम्पल ने किया था।

दरअसल, अंतरिक्ष दूरदर्शी एस्ट्रोसैट की खोज अब हमेशा सुर्खियां बन रही हैं। यह खगोल के लिए पूरी तरह समर्पित एक संपूर्ण वेधशाला है जिसे 28 सितम्बर 2015 को अंतरिक्ष में स्थापित किया गया। हाल ही में इसने एक अन्य विशेष तारापुंज एनजीसी-18 8 का भी अध्ययन किया था। इसरो ने कहा है कि एस्ट्रोसैट का पे-लोड यूवीआईटी विशाल आकाशगंगाओं में तारों के गठन के अध्ययन में एक उत्कृष्ट उपकरण साबित हो रहा है।

ये होती है आकाशगंगाएं
भारतीय ताराभौतिकी संस्थान,बेंगलूरु के प्रोफेसर रमेश कपूर (सेनि) ने बताया कि आकाशगंगा अरबों तारों का विशाल समूह होता है जो अपने सम्मिलित गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में एक विशेष आकृति ले लेता है। इनकी शक्ल गोलाकार, दीर्घ वृत्ताकार हो सकती है और गोलाकृति के किनारे पर सर्पिल भुजाएं भी हो सकती हैं। ऐसी आकाशगंगाओं को स्पाइरल गैलेक्सी या सर्पिल आकाशगंगा कहते हैं। इनके लिए मंदाकिनी शब्द का भी इस्तेमाल होता है। ऐसी किसी भी आकाशगंगा में अक्सर जगह-जगह पर गैसों के विशाल बादल (निहारिकाएं) होते हैं जहां नए तारों के निर्माण की प्रक्रिया चलती रहती है। इनका आकार 50 हजार प्रकाश वर्ष से लेकर कई लाख प्रकाश वर्ष तक हो सकता है। हमारी आकाशगंगा जिसका एक सदस्य हमारा सौरमंडल भी है एक सर्पिल आकाशगंगा है। इसके केंद्र भाग में तारे ज्यादा निकटतवर्ती ढंग से वितरित हैं इसलिए यह अलग-अलग तारों के स्थान पर केंद्र भाग में गैस के बादल सरीखी दिखती है। हमारा सौरमंडल हमारी आकाशगंगा के केंद्र से लगभग 27 हजार प्रकाश वर्ष दूर है और इसका अपना आकार लगभग एक लाख प्रकाश वर्ष है। इसमें दो सौ अरब तारे हैं। इन अरबों तारे के अपने ग्रह मंडल भी हो सकते हैं।