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भारत बंद: बिहार में झड़प के बाद अब पंजाब में हिंसा, दुकान बंद कराने को लेकर चली तलवारें

यह बंद सोशल मीडिया के माध्यम से बुलाया गया है। व्यावहारिक रूप से कोई नेता, पार्टी या संगठन इस बंद का नेतृत्व नहीं कर रहा।

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नई दिल्ली। दो अप्रैल को एससी/एसटी कानून को कमजोर करने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ दलितो क बंद के खिलाफ आज सवर्णों की ओर से भारत बंद किया गया है। इस दौरान थाना क्षेत्र के आनंदनगर इलाके में बंद समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसक झड़प हुई। झड़प में दोनों ओर से फायरिंग शुरू हो गई। पथराव के दौरान 7 लोग घायल हो गए। घायलों में एक सहायक अभियंता भी बताए जा रहे हैं।

पंजाब के फिरोजपुर में हिंसा

वहीं, पंजाब के फिरोजपुर में बंद के दौरान हिंसा भड़क गई। मार्केट बंद कराने उतरे लोगों ने वाहनों पर पथराव कर दिया। जबकि विरोध करने पर लोगों ने तलवार से हमलर कर दिया, जिसमें दो लोग जख्मी हो गए। सरी ओर आरा में ही सैकड़ों युवाओं ने पटना पैसेंजर ट्रेन को रोक दिया और पटरी बैठक नारेबाजी की। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। बंद के दौरान प्रदर्शन कर रहे लोगों ने हाजीपुर में केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की। कुशवाहा बंद के दौरान जाम में फंस गए तभी मौजूद प्रदर्शनकारियों ने उनको घेर लिया।

हो गई थी 10 लोगों की मौत

यह बंद सोशल मीडिया के माध्यम से बुलाया गया है। व्यावहारिक रूप से कोई नेता, पार्टी या संगठन इस बंद का नेतृत्व नहीं कर रहा। बता दें कि दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व राजस्थान समेत कई राज्यों में हिंसात्मक घटनाएं हुईं थी, जिसमें करीब 10 लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल गए थे। वहीं, बंद को लेकर गृहमंत्रालय ने सभी राज्यों के लिए एडवाइजरी जारी की है।

सभी राज्यों में अलर्ट जारी

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) के भारत बंद के दौरान हुए संघर्ष के विरोध में सोशल मीडिया पर विभिन्न आरक्षण विरोधी संगठनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद के मद्देनजर सभी राज्य सरकारों से किसी तरह की हिंसा व जान-माल के नुकसान से बचने के लिए विशेष रूप से सतर्क रहने के लिए कहा है। सूत्रों ने कहा कि मंत्रालय ने खासतौर से राज्य सरकारों को जिला मजिस्ट्रेट और जिला पुलिस प्रमुखों को उनके अधिकार क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाए जाने के लिए कहा है।

गश्त बढ़ाने के निर्देश

राज्यों को सुरक्षा-व्यवस्था मजबूत करने और जरूरत पड़ने पर निषेधाज्ञा जारी करने सहित किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए उचित व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि किसी तरह के जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए राज्यों को सभी संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच, केरल में 30 दलित संगठनों द्वारा बंद का आह्वान किए जाने के बाद सोमवार को राज्य में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। यह बंद अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अधिनियम को कमजोर करने के खिलाफ आहूत किया गया है। ट्रेड यूनियनों द्वारा देशभर में बुलाए गए बंद के चलते दो अप्रैल को भी राज्य में ऐसे ही बंद का असर देखने को मिला था।

आवाजाही रोकने का प्रयास

सरकारी स्वामित्व वाले सड़क परिवहन निगम, निजी बस संचालकों और व्यापार निकाय ने इससे पहले ऐलान किया था कि परिवहन और कामकाज सामान्य रहेगा, लेकिन कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने बसों की आवाजाही रोकने के लिए सड़कें अवरुद्ध कर दी। दुकानों, खासकर कन्नूर जिले की दुकानों को बंद रखने के लिए कहा गया। कोल्लम में सरकारी बसों पर पत्थर फेंके गए। विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने तीन अप्रैल को अपने फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिसके बारे में कार्यकताओं का कहना है कि यह दलित और अनुसूचित जनजाति को संरक्षण प्रदान करने वाले कानून को कमजोर करता है।