
नई दिल्ली। बहुचर्चित कठुआ गैंगरेप-मर्डर केस में नया तथ्य सामने आया है। अब इस केस की सुनवाई आईपीसी की धारा के तहत नहीं होगी। बल्कि इस मामले की सुनवाई अब आरपीसी के तहत होगी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विशेष आदेश देकर इस केस का ट्रांसफर पठानकोट कर दिया, लेकिन भारत में लागू होने वाले कानून की धाराओं के तहत इस पर फैसला नहीं किया जाएगा।
इस कारण से होगा ऐसा
आपको बता दें कि कि भारतीय संविधान में जम्मू-कश्मीर को स्वायत्ता प्रदान की गई है। अनुच्छेद 370 के दिए गए इस विशेषाधिकार के चलते ही यहां भारतीय दंड संहिता लागू नहीं होती। जम्मू-कश्मीर का अपना अलग पीनल कोड यानी दंड संहिता है, जिसे आरपीसी कहते हैं। जम्मू-कश्मीर में हुए सभी अपराधों पर सुनवाई आरपीसी के तहत ही होती है। ऐसे में कठुआ केस भी इसी के तहत सुना जाएगा और इसी पीनल कोड के तहत सजा सुनाया जाएगा। दरअसल, दोनों दंड संहिताओं में कोई खास फर्क नहीं है। जम्मू-कश्मीर की दंड संहिता यानी आरपीसी में विदेश या समुद्री यात्राओं के दौरान होने वाले अपराधों को लेकर कोई नियम-प्रावधान नहीं है। जबकि, कुछ धाराओं में भारत के बजाय जम्मू-कश्मीर का जिक्र है। हालांकि, शेष धाराएं लगभग समान हैं लेकिन उनकी संख्या में जरूर बदलाव है। खास तौर पर दुराचार और हत्या जैसे जघन्य मामलों में सजा आईपीसी के बराबर ही है।
पठानकोट में होगी अब इस केस की सुनवाई
गौरतलब है कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित परिजन के आग्रह पर इस केस जम्मू-कश्मीर से पठानकोट ट्रांसफर कर दिया। अब इस केस की सुनवाई यहीं होगी। लेकिन, इस केस में आईपीसी धारा के तहत न तो सुनवाई होगी और न ही सजा सुनाया जाएगा। बहरहाल, इन दिनों पूरे देश की नजर कठुआ गैंगरेप-मर्डर केस पर टिकी हुई। अब देखना यह होगा कि कोर्ट इस केस में क्या फैसला सुनाता है।
Published on:
12 May 2018 12:41 pm
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