ड्रिंक एंड ड्राइव रोकने के लिए बिहार की बिटिया ने सरकार को दी बेहद सस्ती 'मशीन'

पीकर वाहन चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए बिहार की बिटिया ने एक शानदार मशीन ईजाद की है।

पटना। शराब पीकर वाहन चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए बिहार की बिटिया ने एक शानदार मशीन ईजाद की है। बेहद सस्ती कीमत वाली इस मशीन को कार में लगाने से अगर चालक ने शराब पी है, तो कार स्टार्ट ही नहीं होगी और जब तक ड्राइवर अपनी सीट से हट नहीं जाता, कार नहीं चलेगी।

पूर्णिया के भावनीपुर प्रखंड निवासी ऐश्वर्य प्रिया ने वाहनों के लिए एक ऐसी मशीन बनाई है, जो न केवल 'अल्कोहल' (शराब) की पहचान करती है, बल्कि अगर कोई शराब पीकर गाड़ी चलाने की कोशिश करता है तो गाड़ी खुद से बंद भी हो जाएगी।

ऐश्वर्य का मानना है कि इस मशीन को वाहनों में लगाए जाने से वाहन दुर्घटना को भी रोका जा सकता है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के लक्ष्मी नारायण कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस से बीटेक कर रही ऐश्वर्य प्रिया को कई महीनों की कड़ी मेहनत के बाद उन्हें यह सफलता मिली है।

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उन्होंने कहा, "अगर सरकार वाहनों में इस मशीन को लगाए तो शराब पीकर कोई गाड़ी नहीं चला पाएगा। आए दिन शराब पीकर होने वाले हादसों को भी इस मशीन के वाहनों में इस्तेमाल से रोका जा सकेगा।"

पुणे में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की इनोवेटिव मॉडल एवं प्रोजेक्ट प्रतियोगिता में ऐश्वर्य को इस मशीन के लिए पहला स्थान भी मिला है। इस प्रतियोगिता में देशभर की 125 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं और 84 प्रतियोगिता के लिए चुना गया। ऐश्वर्य के मुताबिक इस प्रोजेक्ट का नाम 'अल्कोहल डिटेक्टर एंड ऑटोमेटिक इंजन लॉकिंग सिस्टम' रखा है।

ऐश्वर्य प्रिया कहती हैं कि यह एक छोटी सी मशीन है, जिसे गाड़ी के डैश बोर्ड पर आसानी से फिट किया जा सकता है। इस मशीन का एक तार गाड़ी की बैटरी और दूसरा इंजन से जुड़ा होता है। जैसे ही कोई ड्राइवर शराब पीकर गाड़ी चलाएगा, सामने लगी अल्कोहल डिटेक्टर मशीन उसकी सांस से अल्कोहल को पकड़ लेगी। इसके बाद मशीन इंजन को बंद कर देगी। जब तक शराब पिया चालक वाहन से उतर नही जाएगा, तक तक गाड़ी स्टार्ट नहीं होगी।

जहां शराबी को पकड़ने के लिए ब्रेथेएनालाइजर मशीन को मुंह में लगाया जाता है, इस मशीन में मुंह लगाने की जरूरत ही नहीं है। सिर्फ सांस की बदबू से ही अल्कोहल को डिटेक्ट किया जा सकता है, जो अल्कोहल का लेबल भी बताएगा। अगर सरकार इस प्रोजेक्ट पर काम करे तो महज आठ से नौ सौ रुपये में मशीन बनाकर वाहनों में लगाई जा सकती है।

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अमित कुमार बाजपेयी
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