
नई दिल्ली : बोफोर्स घोटाले ने 80 के दशक में बड़ा हंगामा बरपाया था। इसका नतीजा यह हुआ था कि कांग्रेस की राजीव गांधी सरकार को जाना पड़ा था और अमिताभ बच्चन को सांसद पद से इस्तीफा देना पड़ गया था। अब वह एक बार फिर गरमाता दिख रहा है। अब यह एक बार फिर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में है। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को बोफोर्स तोप सौदा मामले में आरोपियों के खिलाफ 31 मई 2005 को दिल्ली हाईकोर्ट के दिए आरोप को खारिज करने के फैसले को चुनौती दी गई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में घोटाले में यूरोप में रहने वाले हिंदुजा भाइयों पर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया था।
अटार्नी जनरल से सलाह लेकर किया गया अपील दायर
सीबीआई ने नए साक्ष्यों के आधार पर अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल से बात करने के बाद यह फैसला लिया है। माना जा रहा है कि केके वेणुगोपाल ने सीबीआई को 13 साल बाद अपील दायर न करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि सीबीआई इस मामले में स्पेशल लीव पीटिशन फाइल नहीं करनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया था कि यह मामला कई वर्षों से लंबित है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में यह खारिज हो सकता है। अटार्नी जनरल के अनुसार, तीन महीने के भीतर अपील नहीं करने का सीबीआई का तर्क ठहरता नहीं दिख रहा, क्योंकि मोदी सरकार को भी सत्ता में आए 3 साल से अधिक का वक्त हो चुका है। हालांकि सूत्रों ने बताया कि विचार-विमर्श के बाद वे अपील दायर करने के पक्ष में हो गए, क्योंकि सीबीआई ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य उनके सामने रखे। मालूम हो कि सीबीआई ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के दिए फैसले के खिलाफ तब सुप्रीम कोर्ट नहीं गई थी। अब करीब 13 साल बाद उसने इस फैसले को चुनौती दी है।
64 करोड़ घूस लेने का है आरोप
1986 में 1437 करोड़ रुपए के बोफोर्स तोप घोटाले में भारतीय अधिकारियों को 64 करोड़ रुपए घूस देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अब सीबीआई हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल किया है। इससे पहले बीजेपी नेता व अधिवक्ता ने सर्वोच्च अदालत में इस फैसले को चुनौती दी थी। इसे उन्होंने सीबीआई की ओर से हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील नहीं दायर किए जाने के बाद किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 18 अक्तूबर, 2005 को उनकी उस याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया था। अग्रवाल ने अपने आवेदन में कहा था कि उन्होंने जनहित में अपील दायर की है, क्योंकि सीबीआई आगे नहीं आई और यह कहा गया कि कानून मंत्रालय से एजेंसी को अनुमति नहीं दी गई, जबकि हाईकोर्ट का आदेश गैरकानूनी था।

Published on:
02 Feb 2018 06:53 pm
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