26 अक्टूबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

SC/ST एक्ट पर इस हफ्ते संशोधन बिल लाएगी सरकार, सुप्रीम कोर्ट सुना चुका है फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को दिया था एससी एसटी एक्ट पर फैसला सुनाया था।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Prashant Kumar Jha

•

Updated: 1 Aug 2018, 4:31 PM IST

cabinet approves sc/st bill

SC-ST एक्ट पर इस हफ्ते संशोधन बिल लाएगी सरकार, सुप्रीम कोर्ट सुना चुका है फैसला

नई दिल्ली: केंद्र सरकार SC ST एक्ट में संशोधन बिल इस हफ्ते लाने जा रही है। मोदी कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे पर निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने इस हफ्ते संशोधन बिल लाने का फैसला किया है। बिल लाने के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले की स्थिति बहाल की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को दिया था एससी एसटी एक्ट पर फैसला सुनाया था। सरकार ने दलित संगठनों से 9 अगस्त को भारत बंद को वापस लेने की अपील की है। सूत्रों के मुताबिक मोदी सरकार पर दलित सांसद लगातार बिल लाने का दबाव बना रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार ने इसी हफ्ते संशोधन बिल लाने का फैसला किया है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित (अत्याचार रोकथाम) कानून के मूल प्रावधानों को बहाल करने वाला विधेयक संसद में लाया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट 20 मार्च को सुना चुका है फैसला

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मार्च में फैसला सुनाया था इसमें शीर्ष कोर्ट ने अपने फैसले में संरक्षण के उपाय जोड़े थे, इस पर दलित नेताओं और संगठनों ने आपत्ति जताई थी। नेताओं और संगठनों का कहना था कि इससे यह कानून कमजोर और शक्तिहीन हो जाएगा । भाजपा के सहयोगी और लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष राम विलास पासवान ने न्यायालय का आदेश पलटने के लिए एक नया कानून लाने की मांग की थी। सत्तारूढ़ पार्टी के संबंध रखने वाले कई दलित सांसदों और आदिवासी समुदायों ने भी मांग का समर्थन किया था।

राम विलास पासवान ने दिया था ये बयान

20 जुलाई को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए पासवान ने कहा कि एससी व एसटी एक्ट के क्रियान्वयन के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्णय दिया था, उसकी समीक्षा के लिए केंद्र सरकार ने एक याचिका दायर की है। अगर अदालत का फैसला उलट आया तो सरकार अध्यादेश लाएगी। पासवान ने इस मुद्दे पर दलितों की राजनीति करने वाले दलों को भी कटघरे में खड़ा किया।