CBI निदेशक आलोक वर्मा दूसरे दिन भी पहुंचे सीवीसी मुख्‍यालय, दर्ज कराया अपना पक्ष

CBI निदेशक आलोक वर्मा दूसरे दिन भी पहुंचे सीवीसी मुख्‍यालय, दर्ज कराया अपना पक्ष

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

नई दिल्‍ली। सीबीआई बनाम सीबीआई मामले में निदेशक आलोक वर्मा ने लगातार दूसरे दिन मुख्य सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) के कार्यालय पहुंचे और अपना बयान दर्ज कराया। उनका पक्ष सुप्रीम कोर्ट के अवकाशप्राप्‍त जज एके पटनायक, के वी चौधरी (सीवीसी) की सदस्यता वाली कमेटी ने दर्ज किया। बता दें कि आलोक वर्मा ने गुरुवार को भी सीवीसी ऑफिस पहुंचकर अपना बयान दर्ज कराया था। सीवीसी अधिकारियों के अनुसार वर्मा दक्षिण दिल्ली के आईएनए मार्केट स्थित सीवीसी मुख्यालय दोपहर करीब एक बजे पहुंचे और एक घंटे से अधिक समय तक वहां रहे। बताया जा रहा हैै कि जांंच कमेेेेटी उनसेे नई जानकारी हासिल की है।

वर्मा ने किया आरोपों को खारिज
इससे पहले सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की ओर से लगाए गए रिश्‍वत के आरोपों को मंगलवार को वर्मा ने खारिज कर दिया था। उन्‍होंने कहा कि हमने जो कार्रवाई की वह अस्थाना के खिलाफ चल रहे मामले की जांच से संबंधित थी। सीवीसी को दिए जवाब में वर्मा ने अस्थाना द्वारा लगाए गए सभी आठ आरोपों पर अपने जवाब पेश किए। अस्थाना ने 24 अगस्त को कैबिनेट सचिव से शिकायत की थी कि मांस कारोबारी मोईन कुरैशी के मामले में आरोपी सतीश बाबू साना ने वर्मा को दो करोड़ रुपए की रिश्वत दी थी। दूसरी तरफ एक नाटकीय घटनाक्रम में केंद्र सरकार ने 24 अक्टूबर को वर्मा से सीबीआई निदेशक के सभी अधिकार वापस ले लिए और उन्हें छुट्टी पर भेज दिया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर को सीवीसी को निर्देश दिया कि वह वर्मा पर लगे आरोपों की जांच दो सप्ताह में करे। शीर्ष अदालत ने एक पूर्व न्यायाधीश एके पटनायक को इस जांच की निगरानी का कार्य सौंपा रखा है। दूसरी तरफ वर्मा ने अपने खिलाफ लगे आरोपों और सरकार द्वारा अधिकार वापस लेने और छुट्टी पर भेजने के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

सीबीआई बनाम सीबीआई मामला क्‍या है?
आपको बता दें कि देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई में आंतरिक कलह उस समय सार्वजनिक हो गई जब हैदराबाद के व्यवसायी साना के बयान के आधार पर अस्थाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। सीबीआई ने 15 अक्टूबर को साना से तीन करोड़ रुपए रिश्वत लेने के आरोप में अस्थाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप है कि मीट कारोबारी मोईन कुरैशी के केस को रफ-दफा करने के लिए दो बिचौलियों मनोज प्रसाद और सोमेश प्रसाद के जरिए दो करोड़ रुपए की रिश्वत दी गई थी।

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