29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एयरपोर्ट जा रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है…

दिल्ली हाई कोर्ट ने डीजीसीए के चेक-इन के दौरान 15 से 20 किलो के बीच के बैगेज पर प्रति किलो 100 रुपये का फिक्स चार्ज पर रोक लगा दी है। 

2 min read
Google source verification
luggage

luggage

नई दिल्ली। अगर आप एयरोपोर्ट जा रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है। दिल्ली हाई कोर्ट ने डीजीसीए के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें चेक-इन के दौरान 15 से 20 किलो के बीच के बैगेज पर प्रति किलो 100 रुपये का फिक्स चार्ज रखा गया था। अब हर एयरलाइंस को 15 किलो से ज्यादा वजन तक प्रति किलो 350 रुपये वसूलने का फिर से पहले जैसा ही अधिकार मिल गया। लेकिन अब यह रेट 350 की जगह 250 रुपये कर दिया है। अब हवाई यात्रियों को 15 से ज्यादा और 20 किलो तक वाले बैगेज पर प्रति किलो 250 रुपये की दर से अतिरिक्त चार्ज देना होगा। जिसका सीधा मतलब है कि अगर आपका बैग भारी होगा जो आपकी जेब खाली होगी। बता दें कि पहले एयरलाइंस कंपनियां 20 किलो से ज्यादा बैगेज होने पर अपने हिसाब से चार्ज वसूलने को स्वतंत्र थीं। एयर इंडिया 23 किलो तक के बैगेज के फ्री चेक-इन की अनुमति देता है।

2 साल पहले लागू किए थे फिक्स चार्ज
एयर इंडिया को छोड़कर सभी भारतीय विमानन कंपनियों ने दो साल पहले घरेलू उड़ान में इकॉनमी क्लास से यात्रा करनेवालों के लिए फ्री चेक-इन बैगेज की सीमा 20 किलो से घटाकर 15 किलो कर दी थी। तब एयरलाइंस कंपनियां 15 किलो से ज्यादा वजन वाले बैग पर अतिरिक्त चार्ज वसूल करने लगी थी। आमुमन यह एयरलाइंस 220 से 350 रुपये की दर से चार्ज लेती थी। लेकिन जब यात्रियों ने इस बात की शिकायत की, तो डीजीसीए ने यह आदेश दिया कि कोई भी एयरलाइंस 15 किलो से ज्यादा और 20 किलो से कम के बैग पर 100 रुपये किलो से ज्यादा वजन नहीं ले सकती। हालांकि डीजीसीए ने 20 किलो से ज्यादा वजन वाले बैग पर प्रति किलो अपनी मर्जी से वसूलने का अधिकार कंपनियों के पास बरकरार रखा था।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने कोर्ट में दी थी याचिका
डीजीसीए के 100 रुपये फिक्स चार्ज पर इंडिगो, जेट, गोएयर और स्पाइसजेट जैसी कंपनियों की सदस्यता वाले फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने डीजीसीए के इस निर्देश को अदालत में याचिका दायर की थी। दायर याचिका में फेडरेशन ने कहा था कि सीमा से अधिक वजन वाले बैगेज पर शुल्क की सीमा तय करने का अधिकार डीजीसीए के पास नहीं, बल्कि एयरलाइंस कंपनियों के पास है। उसने कहा कि एयरलाइंस का किराया बाजार की प्रतिस्पर्धा के आधार पर तय होता है। फेडरेशन का कहना था कि डीजीसीए तभी दखल दे सकता है जब कोई भेदभाव का विशेष मामला सामने आए। इसके अलावा नहीं। साथ ही याचिका में कहा गया कि इस तरह के सर्कुल सामान्य परिस्थितियों के लिए जारी नहीं किए जा सकते। इस मामले पर न्यायधीश विभु बखरू ने कहा कि डीजीसीए के पास चेकइन पर बैग के रेट तय करने का कोई अधिकार नहीं है। अतिरिक्त चेक-इन बैगेज पर टैरिफ तय करने का कोई अधिकार नहीं है।

Story Loader