उलझन: विवादित टीआरपी और असमंजस में विज्ञापनदाता

Highlights.

- अमूल ने टीवी पर घटाया विज्ञापन, प्रिंट में बढ़ाया, मारुति ने भी ओटीटी पर 15 फीसदी किया बजट

- टीवी पर विज्ञापन को रोकने के बारे में सलाह दे रही हैं विज्ञापन एजेंसियां

- बार्क की रेटिंग पर रोक लगी हुई है और टीवी के विज्ञापनदाता परेशान हैं

नई दिल्ली.

पहले ओटीटी की मार और अब टीवी की विवादित टीआरपी, इसने टीवी के विज्ञापन बाजार को दोतरफा मार दी है। तीस हजार करोड़ रुपए सालाना के बाजार में अब प्रिंट और डिजिटल मीडिया सेंधमारी कर रहे हैं, जिसके चलते अब टीवी चैनलों को नुकसान शुरू हो गया है। बड़े विज्ञापनदाताओं ने टीवी से दूसरी ओर रुख करना शुरू कर दिया है। जनरल एंटरटेनमेंट का विज्ञापन ओटीटी के कारण तेजी से गिर रहा है तो वहीं न्यूज चैनल का विज्ञापन बार्क के हालिया घटनाक्रम से कम हो गया है।

दरअसल, बार्क की रेटिंग पर रोक लगी हुई है और टीवी के विज्ञापनदाता परेशान हैं। जब रेटिंग ही नहीं है तो फिर विज्ञापन दिए कैसे जाएं। ऐसे में एड एजेंसियां भी उन्हें सलाह दे रही हैं कि अभी विज्ञापन को रोककर रखा जाए। जब स्थित स्पष्ट हो तभी कैंपेन को वापस लांच किया जाए। तब तक दूसरे माध्यमों से रेस्पांस देखा जाए। दूसरी ओर, न्यूज ब्राडकॉस्टर एसोसिएशन (एनबीए) ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (बार्क) की विश्वसनीयता से लेकर उसके काम करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। साफ कहा है कि बार्क को अपना तरीका बदलना चाहिए और काम में पारदर्शिता दिखाना चाहिए।

बार्क ने रेटिंग्स पर रोक लगा दी

टीआरपी में हेरफेर के आरोपों के बाद बार्क ने समाचार चैनलों की रेटिंग्स पर रोक लगा दी। अक्टूबर से शुरू हुई रोक अब भी जारी है। अब जब विज्ञापनदाता कंपनियां टीवी चैनलों के साथ अपने विज्ञापन समझौतों को आगे बढ़ाना चाहती हैं, तब रेटिंग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, लेकिन रेटिंग नहीं होने से सवाल यही खड़ा हो गया है कि आखिर विज्ञापन कैंपेन को कैसे तय किया जाए। एक्सपर्ट की मानें तो एड एजेंसियों ने इस समय टीवी में विज्ञापन करने वालों को सलाह दी है कि वह इस समय पर विज्ञापन को रोक सकते हैं।

अमूल ने घटाया टीवी पर बजट
अमूल के सीएमडी आरएस सोढ़ी कहते हैं, हम पहले भी केवल टीवी रेटिंग के भरोसे कैंपेन तय नहीं करते थे। हमारी विज्ञापन कैंपेन तय करने में हमारे नेटवर्क की राय और हमारी अपनी सोच शामिल होती थी। हालांकि अब बाजार थोड़ा बदला है। हमने जनरल एंटरटेनमेंट से विज्ञापन कम किए हैं। टीवी पर भी अपना शेयर घटाया है, जबकि प्रिंट और खासकर क्षेत्रीय अखबारों को प्राथमिकता देते हुए अपना बजट अखबारों के लिए 15 फीसदी तक बढ़ाया है। बदलते वक्त में बदलाव जरूरी है। हम अपनी गट फीलिंग पर काम करते हैं, उसी का असर है कि हमने रामायण और महाभारत को स्पॉसर किया, हमें दस गुना ज्यादा रेस्पांस मिला।

मारुति की नजर भी ओटीटी पर
टीवी के विज्ञापन बाजार में ओटीटी की सेंधमारी तेजी से जारी है। कंपनियां अपना बजट ओटीटी की ओर बढ़ा रही हैं। मारुति सुजुकी भी ओटीटी बाजार से बेहतर रेस्पांस लेने के लिए अपने बजट को लगातार बढ़ा रही है। मारुति सुजुकी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर सेल्स एवं मार्केटिंग शशांक श्रीवास्तव का कहना है, ओटीटी का बाजार तेजी से बढ़ा है। हम पहले भी इस पर अपना बजट खर्च करते थे, लेकिन इस साल हमने इसको बढ़ाकर 15 फीसदी किया है। हमें उसमें रेस्पांस भी बेहतर मिल रहा है।

Ashutosh Pathak
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