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मुंबई में और गहरा सकता है कोरोना संकट, मई के अंत तक मरीजों की संख्या 70K होने की आंशका

गणितीय सर्वेक्षण में जताई गई है इस बात की आशंका आईडीएमए का दावा, भारत में नहीं होने देंगे हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की कमी भारत दूसरे देशों की तुलना में कोरोना को नियंत्रित करने में सफल

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नई दिल्ली। हर स्तर पर जारी प्रयासों के बावजूद देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कोरोना संकट ( Corona Crisis ) टलने की उम्मीद फिलहाल नहीं है। एक गणितीय सर्वेक्षण की माने तो मई के अंत तक मुंबई में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 70 हजार होने की आशंका है।

अनुमानित कोरोना संकट को ध्यान में रखते हुए बीएमसी ( BMC ) ने महामारी के खिलाफ अभी से अपनी मुहिम तेज कर दी है। बीएमसी कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए कम से कम 3000 अतिरिक्त कोविद-19 बेड मुहैया कराने की योजना पर काम कर रहा है। यह संख्या अनुमानित केस लोड का लगभग 5 फीसदी है।

इस योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा संचालित जीटी अस्पताल और सीएसएमटी के पास सेंट जॉर्ज अस्पताल में कम से कम 600 बेड की अतिरिक्त सुविधा विकसित करने की योजना है। बीएमसी के एक अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार ने इन अस्पतालों में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की सुविधा को बढ़ाने पर जोर दिया है।

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दूसरी तरफ इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ( IDMA ) गुजरात चैप्टर के अध्यक्ष ने कहा है कि भारत में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की कोई कमी नहीं है और देश में एचसीक्यू का मौजूदा उत्पादन एक महीने में 35 से 40 करोड़ टैबलेट का है।

दूसरी तरफ इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ( ICMR ) के निदेशक और कोरोना को लेकर गठित इम्पावर्ड कमेटी के अध्यक्ष डॉ. सीके मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि भारत में लॉकडाउन को लागू हुए एक महीना हो गया। पिछले एक महीने के अंदर कोरोना के संक्रमित मरीजों की संख्या में कोई खास इजाफा नहीं हुआ है। कोरोना के मामलों की बढ़ोतरी चिंता की बात नहीं है। बल्कि भारत दूसरे देशों की तुलना में कोरोना को नियंत्रित करने में सफल रहा है।

उन्होंने कहा कि 23 मार्च को जब 14,915 लोगों का कोरोना टेस्ट किया गया था। तब भी कोरोना के 4 से 4.5 प्रतिशत मामले ही पॉजिटिव पाए गए थे। अभी तक 5 लाख लोगों में कोरोना टेस्ट हो चुका है। आज भी कोरोना पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा औसत 4.5 प्रतिशत ही है। यह एक अच्छा संकेत है। खास बात ये है कि भारत में कोरोना मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी औसतन स्थिर है। मरीजों की संख्या में अस्थिरता नहीं हैं। कहीं से भी मरीजों की संख्या में वर्टिकल बढ़ोतरी के संकेत नहीं हैं।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ( AIIMS ) के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि कोरोना बीमारी का ज्यादातर मामलों में सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है। 80 फीसदी रोगियों को देखभाल की आवश्यकता होती है, जबकि 20 फीसदी पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। इनमें से केवल 5 फीसदी मरीजों को वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है।

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