मुश्किलों से जीतने का एक साल : कोरोना ने जिंदगी में रिश्तों और बचत के महत्व को बताया

कोविड-19 ने जिंदगी में रिश्तों और कम संसाधनों में जीने और बचत के महत्त्व को बताया, जब सबकुछ थम सा गया तो डिजिटल प्लेटफार्म ने आगे बढऩा सिखाया । मुश्किलों से सीखने का एक साल। यह कहें कि कोरोना ने हमें एक कदम पीछे हटकर दो कदम आगे बढऩा सिखाया है तो गलत नहीं होगा।

 

22 मार्च 2020 को देश में जनता कफ्र्यू लगाया गया। सुबह से देर रात तक का सन्नाटा और साथ ही लॉकडाउन की शुरुआत हो गई। ऐसा लॉकडाउन, जिसने निराशा, भय, अनिश्चित्ता की ओर धकेल दिया। गाडिय़ों के पहिए थम गए, रेल की पटरी पर खामोशी छा गई... कारोबार से रोजगार तक सब कुछ नेपथ्य में चले गए। कुछ शेष रहा तो जीवन प्रत्याशा...जिंदा रहने की एक उम्मीद। नहीं मालूम था कि लॉकडाउन के बाद की दुनिया कैसी होगी? क्या वैसी होगी जैसी आज है? तमाम सवाल जेहन में थे। बावजूद इसके इस मुश्किल वक्त से हम बहुत कुछ सीखकर निकले हैं। सीखा है...मुश्किल व अनिश्चित वक्त में कैसे मजबूती के साथ खड़ा रहा जाए...कैसे उसे साथ लेकर आगे बढ़ा जाए। यह कहें कि कोरोना ने हमें एक कदम पीछे हटकर दो कदम आगे बढऩा सिखाया है तो गलत नहीं होगा।

सिखाया : रिश्ते, सेहत और कम संसाधनों में खुश रहना-
जनता कफ्र्यू के बाद 25 मार्च 2020। लॉकडाउन का आधिकारिक पहला दिन। जरा याद कीजिए ...मानो एक झटके में सबकुछ बदल गया था। ना गाडिय़ों का शोर और न बाजारों में चहल-पहल। बस कुछ था तो सन्नाटा। हां इस सन्नाटे को चीरती कभी-कभी पुलिस की गाडिय़ां जो घर में रहने और दिशानिर्देशों की जानकारी का अनाउंसमेंट करते हुए गलियों से गुजरती थीं। वर्तमान में जीने की सोच रखने वाली युवा पीढ़ी को रिश्तों के साथ दो और चीजों का महत्त्व सबसे ज्यादा समझ में आ गया था, पहली सेहत दूसरी बचत। कोरोना महामारी की वजह से लगे लॉकडाउन ने हम-सबकी सोच से लेकर आदतों तक में बड़ा बदलाव किया। कोरोना ने सिखाया बहुत कुछ पर बड़ी कीमत वसूल कर।

नई तकनीक: डिजिटल फ्लेटफार्म-
लॉकडाउन ने हुनरमंद व नौकरी पेशा को डिजिटल प्लेटफार्म पर ला दिया, जहां पर वर्चुअली ऑफिस के काम, मीटिंग आदि सब संभव हुआ। यही नहीं स्कूल की क्लास से लेकर सीखने के लिए डांसिंग, म्यूजिक तक सब कुछ डिजिटल प्लेटफार्म से संभव हो गया। इसके लिए गूगल मीट, जूम जैसे ऐप ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

फिजूलखर्ची नहीं : जरूरी चीजों पर खर्च-
फिजूलखर्ची की बजाय लोगों ने जरूरी चीजों सेहत, टेक्नोलॉजी पर खर्च करना शुरू किया। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए लोग गंभीर हुए। पोषणयुक्त चीजों का प्रयोग बढ़ा। कपड़ों,जूतों समेत आदि की खरीदारी काफी कम हो गई। वर्क फ्रॉम होम व बच्चों की ऑनलाइन क्लास के चलते डिवाइसेस, गैजेट्स और हैल्थ इंश्योरेंस पर भी फोकस किया।

इमर्जेंसी फंड: आपदा के लिए बचत जरूरी-
किसी आपदा से निपटने के लिए इमर्जेंसी फंड सबसे जरूरी होता है। इसके लिए कम से कम ६ माह तक घरेलू व जरूरत की चीजों पर खर्च के लिए धनराशि जरूरी है। ताकि आपदाकाल या नौकरी जाने की स्थिति में बिना किसी दिक्कत के रोजमर्रा की चीजों के लिए आश्रित न होना पड़े। अब लोगों ने इसके लिए सेविंग करना शुरू कर दिया।

बचत-निवेश का महत्व: कमाओ-बचाओ, निवेश करो-
कोरोना ने बचत-निवेश का महत्व बताया। अधिक से अधिक उपभोग करने की बजाय बचत और निवेश के लिए लोग गंभीर हुए। इस महामारी से पहले लोग लोन, के्रडिट कार्ड लेकर खूब खर्च करते थे, लेकिन अब लोगों ने कमाओ-बचाओ और निवेश करो पर ध्यान देना शुरू किया। इसमें सबसे बड़ा बदलाव युवाओं में देखने को मिला।

ऐसे शुरू हुई महामारी...
30 जनवरी: केरल के त्रिशूर में पहला केस
31जनवरी : डब्ल्यूएचओ ने वैश्विक आपदा घोषित किया
03 फरवरी: केरल में3 छात्र और संक्रमित
11 फरवरी: डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस का नाम कोविड-19 दिया
02 मार्च: दिल्ली में दो और नए केस
11 मार्च: डब्ल्यूएचओ ने महामारी घोषित किया
12 मार्च: कर्नाटक में कोरोना से पहली मौत
22 मार्च: जनता कफ्र्यू
25मार्च: 21दिन का लॉकडाउन
२८ मार्च:1251 कोरोना केस
30 मार्च: तब्लीगी जमात मुख्यालय कोरोना हॉटस्पॉट बना
05 अप्रेल: महामारी के खिलाफ मोमबत्ती-दीया जलाने का आग्रह
06 अप्रेल: 4000 से ज्यादा संक्रमित, 100 से अधिक मौतें
01 मई: प्रवासियों के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन
19मई: संक्रमितों की संख्या एक लाख पार
04 जून: वैक्सीन उत्पादन के लिए एस्ट्राजेनेका- सीरम इंस्टीट्यूट के बीच समझौता
०८ जून: अनलॉक 1.0 मॉल, होटल, रेस्तरां, पूजा स्थल खोलने की अनुमति
11 जून: अनलॉक 1.0 कोरोना संक्रमण में भारत चौथे स्थान पर
01 जुलाई: अनलॉक 2.0 ट्रेनें शुरू, रात्रि कफ्र्यू में छूट
अगस्त: अनलॉक3.0 जिम, योग सेंटर खुले, रात्रि कफ्र्यू रद्द
सितंबर: भारत दुनिया का दूसरा सबसे संक्रमित देश
सितंबर: संसद का मानसून सत्र,20 साल में सबसे छोटा सत्र
05 अक्टूबर: 25 करोड़ को जुलाई २१ तक टीकाकरण की घोषणा
जनवरी 2021: 60 वर्ष से अधिक आयु के 1 करोड़ से अधिक लोगों को 15 दिन में वैक्सीनेशन
3.06 करोड़ लोगों को पहला वैक्सीन का डोज दिया जा चुका 18 मार्च तक

ऐसे बदल रही है देश की सूरत -
सबसे तेज अर्थव्यवस्था क्योंकि- 12.6 % जीडीपी में वृद्धि का अनुमान अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट की रिपोर्ट अनुसार साल 2021 में देश की अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे तेजी से बढऩे वाली अर्थव्यवस्था होगी। भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि 12.6 फीसदी रहने का अनुमान है।

ऐसे उबरी अर्थव्यवस्था क्योंकि-

-24% से +0.4% जीडीपी
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 की दो तिमाहियों तक जीडीपी नकारात्मक रही लेकिन तीसरी तिमाही में सकारात्मक हो गई। जैसे-जैसे कोरोना का प्रसार घटता गया वैसे-वैसे अर्थव्यवस्था अनलॉक होती गई। करीब छह माह तक थमा अर्थव्यवस्था का पहिया घूमने लगा।

ऐसे घूमा अर्थव्यवस्था का पहिया -
-24% रही जीडीपी पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में
+0.4% रही जीडीपी तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में
-7.5% रही जीडीपी दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में

कोरोना ने दुनिया को ऐसे मजबूत किया-
46% देशों में महामारी प्रबंधन के संसाधन, अब 91% देशों में
85% देशों में कोरोना जांच की लैब व संसाधन थे, अब 100% देशों में
37% देशों पर ही क्लीनिकल रेफरल सिस्टम, अब 89% देशों में

दुनिया के प्रमुख देशों की अर्थव्यवस्था का हाल-
कोरोना महामारी ने न सिर्फ भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया, बल्कि दुनिया की मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देशों को भी पीछे धकेल दिया।
अमरीका- 33% गिरावट अप्रेैल-जून के बीच, 1947 के बाद पहली बार
जापान -27.8% गिरावट अप्रेल-जून के बीच, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद रेकॉर्ड
फ्रांस 18.9% गिरावट अप्रेल-जून के बीच आई
ब्रिटेन 21.7 की गिरावट अप्रेल-जून के बीच आई
चीन - 3.2% की ग्रोथ दर्ज कराई अपे्रल-जून के बीच

मुश्किलों से जीतने का एक साल : कोरोना ने जिंदगी में रिश्तों और बचत के महत्व को बताया
विकास गुप्ता
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