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2जी स्पेक्ट्रम केस की ‘पिक्चर’ अभी बाकी है, दिल्ली HC ने ए.राजा और कनिमोझी को भेजा है नोटिस

सीबीआई और ईडी ने विशेष अदालत के फैसले को चुनौती दी है। ए. राजा और कनिमोझी को सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया था।

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Delhi High court Sent Notice

Delhi High court Sent Notice

नई दिल्ली: 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले के बाद सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी डाली थी, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। इस संदर्भ में बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व टेलिकॉम मिनिस्टर ए. राजा और डीएमके सांसद कनिमोझी समेत मामले से जुड़े हुए सभी अन्य लोगों को नोटिस जारी किया है। सीबीआई की अर्जी पर हाईकोर्ट में इस मामले पर अब 25 मई को सुनवाई होगी।

सीबीआई कोर्ट ने 2जी मामले के आरोपियों को किया था रिहा
2जी मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस एसपी गर्ग ने ए. राजा, कनिमोझी और अन्य लोगों को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए कहा है। आपको बता दें कि इससे पहले 2जी स्पेक्ट्रम मामले में सीबीआई कोर्ट ने दिसंबर में ए. राजा और कनिमोझी समेत सभी आरोपियों को रिहा कर दिया था। कोर्ट की तरफ से दलील दी गई थी कि सबूतों और गवाहों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी किया गया है। इसके बाद ईडी और सीबीआई ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी।

इन आरोपियों को विशेष अदालत से मिली थी राहत
ए. राजा और कनिमोझी पर सीबीआई की विशेष अदालत ने 21 दिसंबर 2017 को अपना फैसला सुनाया था। इसके साथ ही विशेष अदालत ने ईडी के मामले में 17 अन्य लोगों को भी बरी किया जिनमें द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि की पत्नी दयालु अम्माल, एसटीपीएल के शाहिद बलवा और विनोद गोयनका, कुसेगांव फ्रूट्स एंड वेजिटेबल्स के आसिफ बलवा और राजीव अग्रवाल, फिल्म निर्माता करीम मोरानी तथा कलेंगनर टीवी के निदेशक पी अमृतन और शरद कुमार शामिल है।

क्या था 2जी मामला

2जी मामले में सीबीआई का आरोप था कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में अनियमितताओं के चलते सरकारी खजाने को 30,984 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था और उस समय यूपीए की सरकार थी। 2008 में दूरसंचार विभाग द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस आवंटन में कथित तौर पर अनिमितता हुई थी, जिसका 2010 में CAG की रिपोर्ट के बाद व्यापक स्तर पर खुलासा हुआ। इस घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने की थी। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि ए. राजा दूरसंचार कंपनियों को 2जी मोबाइल एयर वेव्ज और लाइसेंसों के आवंटन को लेकर पक्षपाती थे, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।

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