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क्या आप जानते हैं ब्रह्म कमल कहां खिलता है? पढ़ें पूरी खबर

वनस्पति विज्ञानी बताते हैं कि ब्रह्म कमल अन्य कमल की प्रजातियों की तरह पानी में नहीं बल्कि जमीन पर खिलता है।

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देहरादून। क्या आप ऐसे अनोखे फूल के बारे में जानना चाहेंगे जो केदार घाटी में 13500 फीट की ऊंचाई पर खिलता है? इतना ही नहीं यह साल में एक बार खिलता है और सुबह तक मुरझाने लगता है। ऐसे दुर्लभ फूल ब्रह्म कमल व केदार की अन्य प्राकृतिक संपदाओं के बारे में जानकारी के लिए ‘प्लांट्स ऑफ केदारनाथ वाइल्ड लाइफ सैंक्चुरी, वेस्टर्न हिमालय- फील्ड गाइड’ तैयार की गयी है।

भारतीय वन्य जीव संस्थान (डबल्यूआईआई) और उत्तराखंड़ स्पेस एपलिकेशन सेंटर (यूसैक) ने संयुक्त रुप से इसे तैयार किया है। इस गाइड के माध्यम से दुनिया भर के लोग अब केदारनाथ वन्य जीव विहार के नैसर्गिक सौंदर्य के बारे में जान सकेंगे। ब्रह्म कमल को लेकर तमाम रोचक तथ्य हैं।

वनस्पति विज्ञानी बताते हैं कि ब्रह्म कमल अन्य कमल की प्रजातियों की तरह पानी में नहीं बल्कि जमीन पर खिलता है। ब्रह्म कमल जुलाई से सितंबर के मध्य केवल रात में ही खिलता है। यह मुख्य रूप से यह केदारनाथ, फूलों की घाटी, रूपकुंड, हेमकुंड, ब्रजगंगा में पाया जाता है। धार्मिक महत्व के अलावा इसका आयुर्वेदिक महत्व भी बताया जाता है। कैंसर, खांसी के इलाज में इसे रामबाण बताया जाता है।

ऐसी मान्यता है कि इसे खिलते हुए देखने वाले की मनोकामना जल्द ही पूर्ण हो जाती है। इस फूल का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है जिसने द्रौपदी को इसे पाने के लिए व्याकुल कर दिया था।

केदारनाथ वन्य जीव विहार में ऐसे 575 दुर्लभ किस्म के फूल पाए जाते हैं। मंदाकिनी और अलकनंदा नदियों के आसपास ऐसे फूलों की सबसे अधिक प्रजातियां पाई गई हैं। यहां फूलों की ऐसी कई घाटियां हैं जहां ब्रह्म कमल के अलावा फेन कमल समेत सैकड़ों तरह के फूलों के अलावा, गंदरायन, जटामाशी, भूतकेशी जैसी जड़ी-बूटियां भी उपलब्ध हैं। इतना ही नहीं घाटी में कॉनीफेरस, बगयाल, ओक,
चीड, भूर्ज आदि प्रजातियों के पेड़ भी पाए जाते हैं।

वन्य जीव विहार के 720 पक्षियों की प्रजातियों जैसे हिमालयी मोनल, फ्लाई कैचर और स्तनपायी वन्य जीव की 28 प्रजातियों पाई जाती हैं। इस क्षेत्र में विलुप्तप्राय कस्तूरी मृग सहित सफेद तेंदुए, भारल, सेराव, काले भालू, तेंदुए, भेड़िए, गोरल और तहर भी पाए जाते हैं।

गौरतलब है कि केदारनाथ जैविक संपदाओं से भरा पड़ा है। जिसके कारण यह क्षेत्र देश-विदेश के पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है। जैविक विविधता से परिपूर्ण केदारनाथ का हिंदुओं में धार्मिक महत्व भी है। इसी क्षेत्र में देश के बारह ज्योर्तिलिंगों में से केदारनाथ जी भी हैं। अन्य धार्मिक स्थान जैसे कि पंच केदार, चौखंभा, नीलकंठ भी इसी क्षेत्र में स्थित हैं।

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